नेपाल में पार्टियाँ संयम बरतें: मून

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून
Image caption संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने अपील है कि सभी पक्ष शांति समझौते का पालन करें

नेपाल में चल रहे राजनीतिक संकट के बारे में भारत ने उम्मीद जताई है कि शांति प्रक्रिया को प्रभावित किए बैगर नेपाल सर्वसम्मति से विवाद को सुलझा लेगा.

वहीं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने नेपाल की सभी पार्टियों से संयम बरतने के लिए कहा है.

उनके कार्यालय से जारी हुए बयान में कहा गया है, "महासचिव संयम बरतने और सर्वसम्मति बनाने की अपील करते हैं. उनकी अपील है कि सब शांति समझौते का पालन करें."

आंतरिक मामला

नेपाल में चल रहे राजनीतिक संकट के बारे में भारत ने उम्मीद जताई है कि शांति प्रक्रिया को प्रभावित किए बैगर नेपाल सर्वसम्मति से विवाद को सुलझा लेगा.

भारत का कहना है कि नेपाल की पार्टियों को ख़ुद ही इस संकट से उभरना होगा क्योंकि ये नेपाल का आंतरिक मामला है.

पीटीआई के मुताबिक विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बयान में कहा है, "नेपाल में जो हो रहा है वो उसका आंतरिक मामला है. हम नेपाल को अपनी शुभकामनाएँ देते हैं."

उन्होंने ये बयान नेपल के प्रधानमंत्री प्रचंड के इस्तीफ़ा देने के बाद दिया.

प्रणब मुखर्जी ने कहा, "भारत उम्मीद करता है कि नेपाल में ये मसला हल हो जाएगा ताकि शांति प्रक्रिया पूरी हो सके. हमें उम्मीद है कि पार्टियों के बीच सहमति के ज़रिए नेपाल के नेता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाएँगे."

विवाद

नेपाल में सेनाध्यक्ष को हटाए जाने के मामले पर राष्ट्रपति रामबरन यादव से मतभेद के बाद प्रचंड ने सोमवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

उन्होंने टेलीविज़न पर राष्ट्र के नाम संबोधन किया था और कहा था, "मैंने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. राष्ट्रपति का क़दम असंवैधानिक और लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है. देश का अंतरिम संविधान राष्ट्रपति को एक समांतर शक्ति के रूप में काम करने की अनुमति नहीं देता."

रविवार को कैबिनेट की बैठक में सेनाध्यक्ष रुकमनगुद कटवाल को हटा दिया गया था. लेकिन राष्ट्रपति रामबरन यादव ने इस फ़ैसले को असंवैधानिक बताते हुए सेनाध्यक्ष को अपने पद पर बने रहने को कहा.

सेना में पूर्व माओवादी विद्रोहियों को शामिल करने के मुद्दे पर सरकार और सेनाध्यक्ष में मतभेद थे.

नेपाल में सेना और माओवादी विद्रोहियों के बीच एक दशक तक भारी लड़ाई चली थी जिसमें लगभग 13 हज़ार लोग मारे गए.

वर्ष 2006 में नेपाल सरकार और माओवादियों के बीच एक शांति समझौते के बाद इस गृहयुद्ध का अंत हुआ.

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