प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद छोड़ा

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड
Image caption प्रचंड ने इस्तीफ़ा देने के बाद राष्ट्रपति के क़दम असंवैधानिक और लोकतंत्र के ख़िलाफ़ बताया

नेपाल में सेनाध्यक्ष को हटाए जाने का मामले पर राष्ट्रपति रामबरन यादव से मतभेद के बाद पुष्प कमल दहाल यानी प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

सोमवार को टेलीविज़न पर राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रचंड ने अपने त्यागपत्र की घोषणा की. उन्होंने कहा, "मैंने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. राष्ट्रपति का क़दम असंवैधानिक और लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है. देश का अंतरिम संविधान राष्ट्रपति को एक समांतर शक्ति के रूप में काम करने की अनुमति नहीं देता."

सेनाध्यक्ष रुकमनगुद कटवाल को हटाए जाने के मामले ने ज़्यादा तूल ले लिया था. लेकिन मामले में उस समय ज़बरदस्त मोड़ आया, जब राष्ट्रपति रामबरन यादव ने इस फ़ैसले को असंवैधानिक बताते हुए सेनाध्यक्ष को अपने पद पर बने रहने को कहा.

रविवार को कैबिनेट की विशेष बैठक में सेनाध्यक्ष रुकमनगुद कटवाल को हटा दिया गया था.

असंवैधानिक क़दम

राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल यानी प्रचंड ने अपने पद से त्यागपत्र देने की घोषणा की और कहा कि राष्ट्रपति ने लोकतंत्र के ख़िलाफ़ काम किया है और एकतरफ़ा क़दम उठाया है.

सेना में पूर्व माओवादी विद्रोहियों को शामिल करने के मुद्दे पर सरकार और सेनाध्यक्ष में मतभेद थे. रविवार को कैबिनेट की विशेष बैठक में सेनाध्यक्ष कटवाल को हटाने का फ़ैसला किया गया था.

हालाँकि कैबिनेट की बैठक में भी मतभेद उभरे लेकिन बहुमत से सेनाध्यक्ष को हटाने का फ़ैसला हुआ.

इस फ़ैसले के बाद नेपाल में कई विपक्षी पार्टियों ने सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया और लोगों ने टायर जलाकर अपने ग़ुस्से का इज़हार किया.

अंतरिम सरकार में दूसरे सबसे बड़े दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (एकीकृत माओवादी लेनिनवादी) ने नेपाली प्रधानमंत्री प्रचंड के फ़ैसले से नाराज़ होकर सरकार से समर्थन वापस ले लिया. इस कारण माओवादियों के बहुमत वाली सरकार अल्पमत में आ गई.

संकट के कारण दो साल पहले माओवादियों और नेपाल सरकार के बीच हुए शांति समझौते के भविष्य को लेकर भी आशंका जताई जा रही है.

बर्ख़ास्तगी

सेनाध्यक्ष को सरकारी आदेशों के उल्लंघन के आरोप में हटाने का फ़ैसला किया गया था.

माओवादियों की इच्छा थी कि पूर्व माओवादी विद्रोहियों को सेना में शामिल कर लिया जाए लेकिन जनरल कटवाल इसके पक्ष में नहीं थे.

इस मुद्दे पर नेपाल में पिछले कुछ समय से सरकार और सेना के बीच तनातनी चल रही थी.

ये मामला अदालत में भी गया और मार्च में नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय के सेना के आठ जनरलों को सेवानिवृत्त किए जाने के फ़ैसले पर रोक लगा दी थी.

जनरल कटवाल चार महीने बाद अवकाश प्राप्त करनेवाले हैं. सेनाध्यक्ष को बर्ख़ास्त करने के फ़ैसले से नेपाल में राजनीति गरमा गई है.

रविवार को उन्हें हटाए जाने के बुलाई गई मंत्रिमंडल की बैठक से गठबंधन के कई घटकों के प्रतिनिधियों ने विरोध जताया और बैठक से उठकर चले गए.

मगर कई सहयोगी दलों के विरोध के बावजूद प्रचंड ने सेनाध्यक्ष को बर्ख़ास्त कर उनकी जगह सेना में दूसरे नंबर के अधिकारी जनरल कुल बहादुर खड़का को कार्यवाहक सेनाध्यक्ष नियुक्त कर दिया.

भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने नेपाल के घटनाक्रम को वहाँ का आंतरिक मामला बताया है. विदेश मंत्रालय के एक बयान में आशा व्यक्त की गई है कि मौजूदा संकट का समाधान इस तरह हो कि उससे शांति प्रक्रिया को पूरा करने में भी सहायता मिल सके.

भारत की भूमिका का आरोप

नेपाल में सेना और माओवादी विद्रोहियों के बीच एक दशक तक भारी लड़ाई चली थी जिसमें लगभग 13 हज़ार लोग मारे गए.

वर्ष 2006 में नेपाल सरकार और माओवादियों के बीच एक शांति समझौते के बाद इस गृहयुद्ध का अंत हुआ.

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