नेपाल में भारतीय होने का नशा

काठमांडू में विरोध-प्रदर्शन
Image caption नेपाल के लोग भारत को अपना बड़ा भाई मानने को तैयार हैं

श्याम सुंदर, बीबीसी, काठमांडू, नेपाल. यहाँ के राजनीतिक संकट पर पहली रिपोर्ट का साइन ऑफ़. मामूली सी बात किसी भी रिपोर्ट के लिए.

लेकिन दिल्ली ब्यूरो से एक साथी ने टोक दिया, भाई काठमांडू काफ़ी था, नेपाल कहने की क्या ज़रूरत थी, कोई ऐसा शहर थोड़ी है जिसके बारे मे किसी ने सुना ही ना हो.

मैंने स्पष्टीकरण दिया. यही मेरा स्टाइल है. लेकिन थोड़ा रुक कर सोचा. स्टाइल तो ठीक है. लेकिन ये एक सवाल तो है.

क्या आप कहते हैं न्यूयॉर्क, अमरीका या फिर झुमरी तैलया, झारखंड, भारत. शायद नही. शायद क्या, ज़्यादातर रिपोर्टर नहीं कहते हैं. फिर काठमांडू, नेपाल क्यूं.

पहली बार जब नेपाल आया था, तो इस देश मे इमरजेंसी थी. पत्रकारों से भरे हवाई जहाज़ से रेहान फ़ज़ल के साथ एयरपोर्ट पर उतरा.

इमिग्रेशन फ़ॉर्म भरने के बाद लाइन मे लगा था. काफ़ी लंबी लाइन थी. कुछ ही पल हुए थे एक साहब आए और उन्होने पूछा- दिल्ली से हैं. हमने जवाब दिया-हां.

उन्होंने हमारे फ़ॉर्म लिए और बस हम हवाई अड्डे से बाहर. लेकिन इस बीच एक नेपाली नौजावान चिल्लाया था- दिल्ली से हैं. तो?

लेकिन तब कहाँ उस नौजवान की आवाज़ असर करने वाली थी. हम नशे में थे दिल्ली के होने के नशे में. प्रेमचंद की कहानी तो आपने पढ़ी होगी- नशा.

उम्मीदें

इसके बाद क्या देखा और क्या सुना, मामला लंबा हो जाएगा. लेकिन अब जबकि एक और राजनीतिक संकट को कवर करने आया हूँ.

मैं अकेला नहीं था मेरी ही फ़्लाइट में कई और भारतीय पत्रकार भी थे. पहली बार आने में और इस बार के आने के बीच नेपाल की नदियों मे काफ़ी पानी बह चुका है.

लेकिन दिल्ली से आने वालों का नशा है कि टूट नहीं रहा है. इस देश के प्रधानमंत्री को लगभग धमकाने वाले लहज़े में दिल्ली से आने वाले पत्रकार सवाल पूछते हैं और जो मन में आए रिपोर्ट में कहते हैं.

जब कोई नेपाली दुकानदार किसी चीज़ का दाम बताता है तो ठसके से कहते हैं- एनसी में नहीं आईसी में बताओ.

भारत का एक रुपया नेपाल के डेढ़ से कुछ ही ज़्यादा है लेकिन है तो ज़्यादा ही ना. चलिए कहानी समेटते हैं.

कहना मात्र इतना है की नेपाल एक राजनीतिक संकट से नहीं गुज़र रहा है बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया यहाँ चल रही है.

भारत से इस देश को, यहाँ की राजनीतिक पार्टियों को बहुत उम्मीदें हैं. भारत का भला इसी में है कि उसका नशा टूटे और वो समझे की नेपाल के पास खोने को कुछ नही है. भारत का यहाँ बड़ा दांव है.

अगर नेपाल एक रुपया खोता है तो भारत डेढ रूपया यहाँ नेपाल मे जहाँ भी जाओ आप दुनिया के किसी भी मुल्क से हों, आप कोई भी भाषा बोलते हों- आपका अभिवादन लोग नमस्ते कह कर ही करते हैं.

भारत को बिग ब्रदर मानने को नेपाल तैयार है. मानता है. लेकिन आप दादा हो जाओगे तो मुश्किल होगी.

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