'भारत-पाक विदेश सचिव जल्द मिलेंगे'

मनमोहन सिंह और आसिफ़ अली ज़रदारी
Image caption मुंबई हमलों के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की मुलक़ात हुई

भारत के मुंबई शहर पर नवंबर में हुए हमलों के बाद भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के बीच पहली बार रूस के यकतरीनबर्ग शहर में बैठक हुई है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार बैठक के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा, "दोनों देशों के बीच सहमति बनी है कि जल्द ही दोनों देशों के विदेश सचिव आपस में मिलेंगे, एक-दूसरे के साथ जानकारी का आदान-प्रदान करेंगे और आतंकवाद के विषय पर चर्चा करेंगे."

रूस के यकतरीनबर्ग शहर में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में दोनों देशों के नेता पर्यवेक्षकों को रूप में मौजूद हैं. भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह वहीं अब ब्रिक देशों (ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन) के सम्मेलन में भाग ले रहे हैं.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मुंबई में पिछले साल नवंबर में हुए हमलों के बाद भारत-पाकिस्तान समग्र वार्ता पर विराम लगा हुआ है.

मनमोहन के तेवर तीखे

समाचार एजेंसियों के अनुसार भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति ज़रदारी से कहा, " मैं आपसे मिलकर ख़ुश हूँ लेकिन मेरी ये ज़िम्मेदारी है कि मैं आपको बता दूँ कि पाकिस्तान की भूमि का इस्तेमाल भारत के ख़िलाफ़ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए."

उधर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने मीडिया को बताया, "मैं इसे तल्ख़ रवैया नहीं मानता. दोनों नेता इस सम्मेलन के दौरान, मुंबई की दुखद घटनाओं के बाद पहली बार मिले हैं, ये अपने आप में बहुत सकारात्मक क़दम है."

क़ुरैशी का कहना था कि देशों को 'आतंकवाद का मिलकर सामना करना है फिर वह देश चाहे भारत, पाकिस्तान, ब्रिटेन या फिर अमरीका हो.' उनका कहना था कि 'आतंकवाद का सामना क्षेत्रीय स्तर पर होना चाहिए.'

भारत और पाकिस्तान के 'विदेश सचिवों की जल्द प्रस्तावित बैठक' का ज़िक्र करने के बाद पाकिस्तानी विदेश सचिव क़ुरैशी ने कहा, "दोनों देशों के राजनीतिक नेतृत्व की बैठक शर्म अल-शेख़ में होगी." इस साल जुलाई माह के मध्य में मिस्र में गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सदस्यों की बैठक होनी है.

'आपसी सहयोग ज़रूरी'

भारत-पाकिस्तान के नेताओं की बैठक से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा है कि 'ये ज़रूरी है कि हम विश्व स्तर पर सच्चे दिल से एक-दूसरे के साथ सहयोग कर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को हराएँ.'

उनका कहना था, "हम शंघाई सहयोग संगठन के क्षेत्र में शांति, ख़ुशहाली और स्थिरता चाहते हैं. हम एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं और इससे काफ़ी लाभ उठा सकते हैं. हम इसी उद्देश्य से शंघाई सहयोग संगठन की विभिन्न शाखाओं से संपर्क में हैं."

मनमोहन सिंह का कहना था, "हम देश के बाहर ऐसा वातावरण चाहते हैं जिससे हमारे देश के लोगों की आकांक्षाएँ पूरी हो सकें. हमारे क्षेत्र में आतंकवाद, चरमपंथी विचारधारा और मादक पदार्थों की तस्करी बड़ी समस्याएँ हैं."

उनका ये भी कहना था कि 'आज की दुनिया में जो भी चरमपंथी घटनाएँ होती हैं वे कई देशों से जुड़ी होती हैं और इनसे कोई भी देश मुक्त नहीं है.'

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