'अफ़ग़ानिस्तान में अहम लड़ाई'

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में चल रही लड़ाई गंभीर है लेकिन देश की भावी स्थिरता के लिए बहुत ज़रूरी भी है.

ये बात उन्होंने स्काई चैनल से बातचीत में कही. ओबामा इनदिनों अफ़्रीका के दौरे पर हैं.

ब्रिटिश सैनिकों के बड़ी संख्या में मारे जाने से ब्रिटन में इस अभियान पर चिंता व्यक्त की जा रही है. लेकिन ओबामा ने ब्रिटिश जनता को आश्वास्त करने की कोशिश करते हुए कहा कि यह अभियान पश्चिम में अल क़ायदा के हमलों को रोकने के लिए बहुत ज़रूरी है.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दावा किया कि अमरीका और मित्र देशों के सैनिकों ने मिलकर तालेबान को पीछे धकेल दिया है पर ये भी कहा कि गठबंधन सैनिकों को एक लंबी और मुश्किल लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए.

उन्होंने कहा, "इस समय हमारा लक्ष्य ये है कि अफ़ग़ानिस्तान में होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव शांति से निपट जाएं. उसके बाद हमें नई रणनीति बनानी होगी. चुनाव के बाद हमें इस बात पर ध्यान केंद्रित करना होगा कि अफ़ग़ानिस्तान की सेना और पुलिस बल का गठन कैसे हो, पाकिस्तानियों के साथ कैसे काम किया जाए जिससे वे स्वयं अपने देशों को संभालें."

ब्रितानी सैनिक

उधर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटिश सैनिकों की मौजूदगी को न्यायोचित ठहराते हुए कहा कि ब्रिटिश सैनिक इसलिए अफ़ग़ानिस्तान में तैनात ताकि ब्रिटन को आतंकवादी हमलों से बचाया जा सके.

उनका कहना था, "यह ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है. अब तक अफ़ग़ानिस्तान में एक सौ उनास्सी ब्रिटिश सैनिक मारे जा चुके हैं."

गॉर्डन ब्राउन ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान से आतंकवादी संगठनों का सफ़ाया करने और ब्रिटेन की सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए जो अभियान हमने 2001 में शुरु किया था वह अब भी जारी है. हमें अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाक़ों से इन्हें हटाना है तभी हमारे नागरिकों की सुरक्षा हो सकती है. इसलिए राष्ट्र के प्रति यह हमारा कर्तव्य है."

पिछले एक सप्ताह में अफ़ग़ानिस्तान में 13 ब्रिटिश सैनिकों के मारे जाने से वहाँ की जनता इस पूरे अभियान को संदेह की नज़र से देखने लगी है.

अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने इन मौतों को दुखदायी बताते हुए कहा कि ब्रिटिश सैनिकों का अफ़ग़ानिस्तान में योगदान बहुत महत्वपूर्ण है.

अभियान

उन्होंने कहा कि यह कोई अमरीकी अभियान नहीं है और इसमें यूरोपीय देशों का योगदान और भी अधिक है क्योंकि लंदन में आतंकवादी हमले का ख़तरा अमरीका से कम नहीं बल्कि अधिक है.

ओबामा ने कहा, "हम अफ़ग़ानिस्तान या पाकिस्तान को अल क़ायदा के लिए सुरक्षित स्थान नहीं बनने दे सकते. जिन्होने लंदन के ट्रेन स्टेशनों और न्यूयॉर्क की इमारतों को उड़ा दिया. हमें मालूम था कि गर्मी के मौसम में लड़ाई तेज़ होगी क्योंकि तालेबान अपना नियन्त्रण बढ़ाना चाहता है. हमने उन्हें पीछे धकेल दिया है लेकिन अभी मिशन पूरा नहीं हुआ है."

इस साल जनवरी के महीने में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ओबामा ने अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है.

अमरीका ने कहा है कि इस वर्ष वो अफ़ग़ानिस्तान में 30 हज़ार सैनिक और भेजेगा.

अफ़ग़ानिस्तान में पहले से 33 हज़ार अमरीकी सैनिक और 32 हज़ार नेटो सैनिक मौजूद हैं.

पिछले सप्ताह अमरीकी सैनिकों ने पहला बड़ा अभियान शुरु किया है जिसके तहत चार हज़ार सैनिक हेलमंद नदी के इलाक़े में तैनात किए गए हैं और अफ़ग़ान सैनिक भी उनकी मदद कर रहे हैं.

राष्ट्रपति ओबामा चाहते हैं कि जिस तरह इराक़ में सुरक्षा इराक़ी बलों को सौंप दी गई है उसी तरह अफ़ग़ानिस्तान में किया जा सके.

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