बयान से शांति प्रक्रिया अप्रभावित

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि मुंबई हमले में अभियुक्त अजमल कसाब के भारत में इकबालिया बयान से दोनों देशों के बीच चल रही शांति प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

थाइलैंड में आसियान सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे कुरैशी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच इस बात पर सहमति है कि चरमपंथ की समस्या से दोनों ही जूझ रहे हैं. इस दिशा में एक दूसरे की मदद से ही आगे बढ़ा जा सकता है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री का बयान मुंबई हमलों के अकेले जीवित बचे हमलावर अजमल कसाब के इस कुबूलनामे की प्रतिक्रिया स्वरूप आया है जिसमें उसने अपना दोष स्वीकार किया है.

मुंबई की एक विशेष अदालत में मुंबई हमलों के मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य अभियुक्त मोहम्मद अजमल आमिर क़साब ने कहा है कि वह फाँसी की सज़ा पाने के लिए तैयार है.

इससे पहले सोमवार को सुनवाई के दौरान उसने अपना गुनाह क़बूल कर लिया था. इसके अगले दिन मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई थी.

संबंधों पर असर

मुंबई हमलों के 10 हमलावरों में से एक अजमल कसाब पर मुंबई में मुक़दमा चल रहा है. भारत मुकदमे के साथ साथ पाकिस्तान से भी कहता रहा है कि उनकी ज़मीन पर मौजूद दोषियों के ख़िलाफ़ की कार्रवाई की जानी चाहिए.

पिछले सप्ताह पाकिस्तान में इस बाबत एक मुक़दमे की शुरुआत भी की जानी थी पर ऐन वक़्त पर सुनवाई को टालना पड़ा और उसे अगले सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया.

पिछले साल 26 नवंबर की रात चरमपंथियों ने मुंबई के भीड़-भाड़ वाले छत्रपति शिवाजी टर्मिनल स्टेशन, ताज होटल, ट्राइडेंट-ऑबराय होटल और नरीमन हाउस पर हमले किए थे.

इन हमलों में 170 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और लगभग ढाई सौ लोग घायल हुए थे. हमलावरों में मोहम्मद अजमल क़साब जीवित पकड़ा गया और बाकी नौ मारे गए थे.

इन हमलों के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की प्रक्रिया को ख़ासा नुकसान पहुंचा था. दोनों ओर से तीखी बयानबाज़ियों का दौर शुरू हो गया था और संबंधों में ख़ासी कटुता महसूस की जा रही थी.

हालांकि हाल के दिनों में शांति प्रयासों और संबंध बहाली की दिशा में प्रयास फिर से शुरू हुए हैं पर मुंबई हमलों की चोट अभी भी स्थितियों को पहले जितना सामान्य नहीं होने दे रही हैं.

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