अफ़ग़ान टीवी पर पहली बहस

अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव के कुछ उम्मीदवारों के बीच एक बहस का प्रसारण पहली बार टेलीविज़न पर किया गया.

निजी टेलिविज़न चैनल 'टोलो' पर उम्मीदवारों की बहस गुरुवार को प्रसारित हुई लेकिन वर्तमान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने उसमें हिस्सा नहीं लिया.

Image caption अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति पद के चुनाव अगस्त में होने हैं

यह चुनाव भारी सुरक्षा के बीच 20 अगस्त को होगा. इस चुनाव में कुल 41 उम्मीदवार खड़े हो रहे हैं.

राष्ट्रपति हामिद करज़ई इस बहस से ये कहकर अलग हो गए थे कि यह बहस पक्षपात पूर्ण होगी.

बहस निर्धारित समय से 20 मिनट बाद शुरु हुई. बहस के लिए तीन मंच रखे गए थे लेकिन बीच वाले पाठ मंच को ख़ाली छोड़ दिया गया. यह दिखाने के लिए कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई बहस में शामिल नहीं हो रहे.

बाक़ी दो पर राष्ट्रपति के दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी विदेश मंत्री अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह और भूतपूर्व वित्त मंत्री अशरफ़ ग़नी मौजूद थे. बहस के दौरान दोनों ने अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य संबंधी अपनी अपनी योजनाओं का ब्योरा दिया.

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार अशरफ़ ग़नी जो विश्व बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं. उन्होने राष्ट्रपति करज़ई से कई बार आग्रह किया कि वो बहस में हिस्सा लें.

लेकिन राष्ट्रपति के चुनाव अभियान दल का कहना है कि उन्होने इसलिए हिस्सा नहीं लिया क्योंकि अधिकतर उम्मीदवारों को इस बहस के लिए न्योता नहीं दिया गया और उन्हें भी बहस से एक दिन पहले ही निमंत्रण मिला था.

दो घंटे चली इस बहस में दर्शकों को शामिल नहीं किया गया था. लेकिन टोलो टीवी के संचालकों में से एक जाहिद मोहसनी ने कहा कि इस बहस का उद्देश्य अफ़ग़ानिस्तान में लोकतंत्र को मज़बूत करना था.

उनका कहना था, "ऐसी बहस दुनिया के कई देशों के लिए कोई नई चीज़ नहीं है लेकिन इसके ज़रिए मतदाताओं को उम्मीदवारों को सीधे देखने और सुनने का अवसर मिलता है. साथ ही उम्मीदवारों को मतदाताओं के घर तक पहुंचने और उन्हे अपनी नीतियों के बारे में आश्वस्त करने का मौक़ा मिलता है."

बीबीसी के काबुल संवाददाता मार्टिन पेशेंस का कहना है कि हालांकि टोलो टीवी अफ़ग़ानिस्तान में सबसे अधिक देखा जाता है लेकिन अधिकतर अफ़ग़ानों के पास टेलिविज़न नहीं है इसलिए इस बहस का चुनाव परिणाम पर अधिक असर नहीं पड़ेगा.

अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव क्षेत्रीय नेताओं और क़बाइली नेताओं के बीच हुए समझौतों पर निर्भर करते हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के संविधान के अधीन चुनाव मई में होने थे लेकिन देश की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए उन्हे अगस्त तक के लिए टाल दिया गया.

सुरक्षा स्थिति सुधारने के लिए हज़ारों अतिरिक्त अमरीकी बलों को तैनात किया जाएगा.

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