चर्च ऑफ़ इंग्लैंड खनन विवाद में

Image caption वेदांत में चर्च ऑफ़ इंग्लैंड की हिस्सेदारी है.

पर्यावरणविद् बिएंका जैगर ने चर्च ऑफ़ इंग्लैंड से आग्रह किया है कि वो उस कंपनी में अपने निवेश पर फिर से विचार करे जो भारत में खनन की परियोजना से जुड़ी है.

उनका कहना है कि उड़ीसा में यह खनन उस पहाड़ी पर हो रहा है जिसे वहाँ के जनजातीय लोग पवित्र समझते हैं.

बिएंका जैगर ने इस ब्रितानी कंपनी की सोमवार को होने वाली सालाना बैठक के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है.

चर्च का कहना है कि वह इन आरोपों को लेकर चिंतित है. चर्च के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि वह वेदांत नामक इस कंपनी में अपने निवेश के बारे में विचार कर रहा है.

जबकि वेदांत का कहना है कि उड़ीसा की दूरस्थ नियामगिरि पहाड़ियों पर होने वाली यह खनन परियोजना नैतिक और पर्यावरण की दृष्टि से ठोस है.

'अनैतिक परियोजना'

Image caption बिएंका को कई ग़ैर सरकारी संगठनों का समर्थन हासिल है

बिएंका जैगर को इस अभियान में ब्रिटेन की दो संस्थाओं ऐक्शन एड और सर्वाइवल इंटरनेशनल का भी समर्थन मिल रहा है.

उन्होने कहा, "मैं चर्च ऑफ़ इंगलैंड से अपील करती हूं कि वह इस बात को समझे कि यह खनन परियोजना न केवल स्थानीय जनजातीय संस्कृति और विश्वास के लिए ख़तरा है बल्कि पर्यावरण के लिए भी बहुत हानिकारक है."

बिएंका कहती हैं, "इसका उस इलाक़े के वन्यजीवन पर गहरा असर पड़ेगा जिसमें तेन्दुए और बाघ शामिल हैं और यह परियोजना वहां की नदियों और वनस्पतियों को भी नष्ट कर देगी."

चर्च ऑफ़ इंग्लैंड की वेदांत कंपनी में 25 लाख पाउंड की हिस्सेदारी है.

वेंदांत कंपनी नियामगिरि पहाड़ियों में बॉक्साइट का खनन शुरु करने वाली है जिसे उसी इलाक़े में बनाई गई रिफ़ाइनरी में परिष्कृत किया जाएगा. बॉक्साइट का इस्तेमाल एल्युमीनियम बनाने में किया जाता है.

वेदांत कंपनी और उसके भारतीय हिस्सेदारों पर ये आरोप लगाए गए हैं कि उन्होने स्थानीय लोगों को ज़मीन छोड़ने पर मजबूर किया.

चर्च ऑफ़ इंग्लैंड के नैतिक निवेश सलाहकार समूह के प्रवक्ता ऐडवर्ड मेसन का कहना है कि वो इस परियोजना पर विचार विमर्श करने के लिए जनजातीय लोगों के प्रतिनिधियों और वेदांत के अधिकारियों से मिलेंगे.

उन्होने कहा, " कंपनियों के व्यवहार को सुधारने के लिए हम एक शेयर धारक की हैसियत से अपने प्रभाव का इस्तेमाल करेंगे."

वेदांत कंपनी ने बीबीसी को दिए एक वक्तव्य में कहा है कि कंपनी पर्यावरण प्रबंधन के सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर इस परियोजना को चलाने के प्रति वचनबद्ध है जिससे वहां के लोगों को भी इससे लाभ हो.

कंपनी ने कहा, "हम भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर इस परियोजना को चलाएंगे और अभियान चलाने वाले संगठनों से आग्रह करते हैं कि वो भारतीय प्रशासन के निर्णय का आदर करें."

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