तालेबान के साथ समझौते के प्रयास

अफग़ानिस्तान
Image caption ब्रिटेन और अमरीका की अफ़ग़ान नीति में परिवर्तन हुआ है

अफ़ग़ानिस्तान सरकार अगले महीने होने वाले चुनाव से पहले बडगीड के पश्चिमोत्तर प्रांत में तालेबान विद्रोहियों के साथ एक शांति समझौते पर सहमत हो गई है.

अधिकारियों का कहना है कि इसके तहत तालेबान ने मतदान केंद्रों पर हमले न करने और प्रमुख इलाक़े सरकारी बलों को सौंप देने का वायदा किया है. वैसे, इस बारे में चरमपंथियों की ओर से कोई बयान नहीं आया है.

सरकार ने आशा व्यक्त की है कि अन्य प्रांतों में भी इसी तरह के समझौते हो जाएँगे.

यह क़दम ऐसे समय पर उठाया गया है जब ब्रिटेन इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि तालिबान के मध्यम मार्गी सदस्यों को प्रेरित करने के लिए काम किया जाना चाहिए.

ब्रितानी विदेश मंत्री डेविड मिलीबैंड ने नैटो में दिए एक भाषण में ब्रिटेन की अफ़ग़ान नीति में इस बदलाव की घोषणा की थी.

उन्होंने ज़ोर दिया था कि एक व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया के तहत अफ़ग़ान सरकार को तालेबान के उदारवादी सदस्यों से बात करने के प्रयास करने चाहिए.

हाल के महीनों में जब ब्रितानी और अमरीकी बलों ने अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण में तालेबान चरमपंथियों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए हैं तब से वहाँ हिंसा में बढ़ौतरी हुई है.

बडगीह में हिंसा में कमी

लेकिन बडगीह में पिछले कुछ महीनों में अन्य जगहों के मुक़ाबले कम हिंसा देखी गई.

काबुल में बीबीसी संवाददाता बिलाल सरवरी का कहना है कि तुर्कमेनिस्तान की सीमा से लगा यह प्रांत निकट के घोर और हेरात प्रांत में हमले करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.

नवंबर, 2008 में लगभग 200 चरमपंथियों ने बडगीह में एक क़ाफ़िले पर हमला करके कम से कम तेरह अफ़ग़ान सैनिकों और पुलिसकर्मियों को जान से मार दिया था.

राष्ट्रपति के प्रवक्ता सियामक हिरावी ने बीबीसी से कहा कि बगडीह में हुए समझौते में यह भी शामिल है कि तालेबान मुख्य राजमार्ग का निर्माण करने दें.

संवाददाताओं का कहना है कि यदि तालेबान ने युद्धविराम की शर्तों का पालन करने पर सहमत होने की पुष्टि करदी और यह समझौता अन्य प्रांतों में भी लागू किया गया तो यह इस विवाद को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम माना जाएगा.

लेकिन यह पहली बार नहीं होगा कि अफ़ग़ान सरकार ने तालेबान को बातचीत में शामिल करने के प्रयास किए हैं.

अक्तूबर, 2008 में राष्ट्रपति हामिद करज़ई के भाई ने बीबसी की इस रिपोर्ट की पुष्टि की थी कि वह शांति वार्ता के पहले क़दम के तहत सऊदी अरब में तालेबान के पूर्व सदस्यों से मिले थे.

बीस अगस्त को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव और प्रांतीय परिषदों के चुनाव से पूर्व देश भर में सुरक्षा को लेकर भारी चिंता है.

हामिद करज़ई राष्ट्रपति के पद के लिए लगभग 40 उम्मीदवारों का सामना करने जा रहे हैं.

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