मुशर्रफ़ के फ़ैसले असंवैधानिक घोषित

परवेज़ मुशर्रफ़
Image caption मुशर्रफ़ के जजों के बर्ख़ास्त करने के फ़ैसले का देश भर में जमकर विरोध हुआ था

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के आपातकाल लगाने और जजों को बर्ख़ास्त करने के फ़ैसलों को असंवैधानिक ठहराया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रपति के रुप में दूसरा कार्यकाल हासिल करने के लिए परवेज़ मुशर्रफ़ ने संविधान को जिस तरह से निलंबित किया वह भी संवैधानिक नहीं था.

यह ऐतिहासिक फ़ैसला सु्प्रीम कोर्ट की 14 सदस्यीय पीठ ने सुनाया है जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी कर रहे थे. इफ़्तिख़ान चौधरी वही मुख्य न्यायाधीश हैं जिन्हें 60 न्यायाधीशों के साथ परवेज़ मुशर्रफ़ ने बर्ख़ास्त कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले का वकीलों के संगठनों ने स्वागत किया है.

सुप्रीम कोर्ट का यह ताज़ा फ़ैसला न्यायालय के उस आदेश के एक दिन बाद आया है जिसमें अदालत ने कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला चलाने संबंधी याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता.

अदालत ने कहा था कि मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ दायर याचिका के तहत लगाए गए आरोपों को तय करने की सही जगह संसद है, न कि सुप्रीम कोर्ट. परवेज़ मुशर्रफ़ आजकल पाकिस्तान में नहीं हैं.

मुशर्रफ़ मौजूद नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जब फ़ैसला सुनाया तब पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ अदालत में मौजूद नहीं थे.

परवेज़ मुशर्रफ़ आजकल पाकिस्तान में नहीं हैं. पिछले कुछ महीनों से वे लंदन में हैं.

वर्ष 2007 में जब वे सैन्य प्रमुख रहते हुए दोबारा राष्ट्रपति के पद पर बने रहना चाहते थे तब उन्होंने संविधान को स्थगित रखते हुए आपातकाल लगाने की घोषणा कर दी थी.

उसी समय उन्होंने इफ़्तिख़ार चौधरी सहित 60 अन्य जजों को बर्खास्त कर दिया था.

इन जजों की बर्ख़ास्तगी के साथ परवेज़ मुशर्रफ़ ने नए जजों की नियुक्ति की थी.

क़ानून के विशेषज्ञ अभी भी फ़ैसले के विवरण पढ़ रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि इस फ़ैसले से वर्तमान राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की स्थिति पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.

उल्लेखनीय है कि उन्हें और उनकी दिवंगत पत्नी बेनज़ीर भुट्टो को आपातकाल लगाने के पहले भ्रष्टाचार के मामलों में राहत दे दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की नियुक्ति और राज्य से जुड़े अन्य मसलों पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा है कि वह संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा नहीं करना चाहता.

संविधान के विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट चाहता तो परवेज़ मुशर्रफ़ पर देशद्रोह का मुक़दमा चलाने की अनुमति देकर इस फ़ैसले को और मज़बूत बना सकता था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट पहले ही फ़ैसला सुना चुका है कि वो मुद्दा सुप्रीम कोर्ट का नहीं संसद के विचार करने का है.

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