'आम नागरिक नहीं बनेंगे निशाना'

नैटो सेना
Image caption अफ़ग़ानिस्तान में नैटो सेनाओं और तालेबान लड़ाकों की लड़ाई में बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में इस साल अब तक पिछले साल के मुकाबले 24 प्रतिशत अधिक आम नागरिकों के मारे जाने के बाद नैटो के नवनियुक्त कमांडर ने आश्वासन दिया है कि इस बात का ख़ास ख़्याल रखा जाएगा कि आम नागरिक सैन्य हमलों का निशाना न बनें.

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नैटो) के नेतृत्व वाली सेनाओं के नवनियुक्त कमांडर जनरल स्टेनली क्राइस्टल ने ये आश्वासन दिया है.

उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर आम नागरिक सैन्य हमलों का निशाना बने हैं उन्हें रोकना और ऐसी घटनाओं की जाँच कराने को प्राथमिकता दी जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि सैन्य लड़ाई में पिछले साल के मुक़ाबले इस साल 24 फ़ीसदी अधिक आम नागरिक मारे गए हैं और नागरिकों के मारे जाने की सबसे अधिक घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की बमबारी और हवाई हमलों के दौरान हुई हैं.

'कोड ऑफ़ कॉन्डक्ट'

सैन्य लड़ाई में आम नागरिकों के मारे जाने से अमरीकी सेना भी चिंतित है और यही वजह है कि जून में सेना को सैनिकों को और बेहतरीन प्रशिक्षण देने को कहा गया था.

यही नहीं, तालेबान ने भी पिछले सप्ताह नई आचार संहिता जारी की है जिसके तहत तालेबान लड़ाकों से कहा गया है कि लड़ाई के दौरान वे आम नागरिकों को निशाना न बनाएँ.

जनरल क्राइस्टल ने कहा, "आम नागरिकों का मारा जाना गहरी चिंता का विषय है और हम इस आंकड़ें को शून्य करना चाहेंगे."

उन्होंने कहा कि वे इसे सेना के आचरण में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन माना कि ये काम बहुत मुश्किल है.

क्राइस्टलर ने कहा, "इसमें संतुलन बिठाना बहुत मुश्किल है क्योंकि सैनिकों को अपनी जान बचाकर लड़ाई लड़नी है. उनकी जान बचाने के लिए हवाई हमले या गोलीबारी करनी पड़ सकती है और हम उनका ये कवच नहीं छीनना चाहते."

उन्होंने कहा कि सैनिकों को ये कोशिश करनी चाहिए कि लड़ाई में आम नागरिक निशाना न बनें.

अफ़ग़ानिस्तान में 20 अगस्त को राष्ट्रपति चुनाव के बाद तालेबान के साथ बातचीत की संभावनाओं पर जनरल क्राइस्टल ने कहा कि इस मसले का राजनीतिक समाधान निकालने के लिए अमरीका स्थानीय लड़ाकों और तालेबान समेत किसी से भी बातचीत करने के लिए तैयार है.

संयुक्त राष्ट्र ने चुनावों के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई तेज़ होने और आम नागरिकों के मारे जाने की आशंका जताई है.

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