सूफ़ी मोहम्मद पर देशद्रोह का मुक़दमा

सूफ़ी मोहम्मद
Image caption सूफ़ी मोहम्मद ने चरमपंथियों और सरकार के बीच समझौता करवाया लेकिन शांति नहीं ला सके थे.

पाकिस्तान की स्वात घाटी में सरकार और चरमपंथियों के बीच समझौता करवाने वाले सूफ़ी मोहम्मद पर देशद्रोह और आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया गया है.

एक अधिकारी ने बताया कि इसी साल अप्रैल में सूफ़ी मोहम्मद ने पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव पर सवाल उठाए थे. उन्होंने पाकिस्तान के संविधान को ग़ैर इस्लामी करार दिया था.

सूफ़ी मोहम्मद वही मौलाना हैं जिन्होंने स्वात घाटी में सरकार और चरमपंथियों के बीच शांति समझौता करवाने में मुख्य भूमिका निभाई थी. यह समझौता अब टूट चुका है.

मौलाना के ख़िलाफ़ अगर ये आरोप सही पाए गए तो उन्हें आजीवन कारावास और यहां तक कि फाँसी की सजा हो सकती है.

स्वात में तालेबान के नेता मौलाना फजुल्ला ने कई भाषणों में पाकिस्तानी सरकार की आलोचना की थी. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, हमारे पास उनके सभी भाषणों के रिकॉर्ड हैं जिनसे लगता है कि मौलाना ने लोगों को सरकार के ख़िलाफ़ उकसाया.

स्वात में सेना और चरमपंथियों के बीच छिटपुट झड़पें अभी जारी है. हालांकि पाकिस्तानी सेना वहां से तालेबान को खदेड़ने का दावा कर रही है.

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