पुलिसकर्मियों की लाशें मिलीं

पाकिस्तानी सेना
Image caption बलोचिस्तान के विद्रोही पाकिस्तान सरकार के साथ टकराव का रवैय्या अपनाते रहे हैं.

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में पिछले दिनों जिन 19 पुलिसकर्मियों और 11 पंजाबी भाषी मज़दूरों को बलोच रिपब्लिकन आर्मी यानी बीआरए के विद्रोहियों ने अगवा कर लिया था जिनमें से चार पुलिसकर्मियों की लाशें मंगलवार को मिली हैं. बीआरए का कहना है कि पाकिस्तान की जेलों में बंद बलोच लोगों को तत्काल रिहा किया जाए वर्ना बाक़ी पुलिसवालों को भी मार डाला जाएगा लेकिन विद्रोहियों का कहना है कि मज़दूरों के बारे में अभी उन्होंने कोई निर्णय नहीं किया है कि उनके साथ क्या सलूक किया जाएगा. विद्रोहियों से बातचीत करने की कोशिश चल रही है लेकिन अभी तक दोनों पक्षों का संपर्क भी नहीं हो सका है. क्वेटा से बीबीसी संवाददाता अयूब तरीन का कहना है कि पुलिस बीआरए के बड़े नेताओं से बात करने की कोशिश कर रही है.

बीआरए के प्रवक्ता ने सरबाज़ बलोच ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि प्रशासन से कोई भी बातचीत तभी होगी जब बलोच लोगों को छोड़ा जाएगा.

बीआरए का कहना है कि जेलों में बंद लोगों को रिहा करने के अलावा जो लोग लंबे समय से लापता हैं उन्हें भी सामने लाया जाए. बीआरए का आरोप है कि लापता लोगों को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने बंधक बना रखा है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल वे किसी तरह की आक्रामक कार्रवाई करके लोगों को छुड़ाने पर विचार नहीं कर रहे हैं क्योंकि इससे बंधकों की जान को ख़तरा हो सकता है. बताया जा रहा है कि विद्रोहियों ने पहाड़ों की गुफाओं में अपने ठिकाने बना रखे हैं और वहाँ से लोगों को छुड़ाना कोई आसान काम नहीं है.

बलूचिस्तान पुलिस के डीआईजी शारिक़ जमाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि पुलिसकर्मियों की हत्या बहुत अफ़सोस की बात है और बाक़ी लोगों को छुड़ाने की हरसंभव कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा, "बातचीत का रास्ता खुला हुआ है, हम ऐसे लोगों के संपर्क में हैं जिनकी मदद से बाक़ी लोगों की रिहाई हो सकती है, हमारे पास दूसरे विकल्प भी हैं लेकिन हमारी प्राथमिकता अपने लोगों को सकुशल रिहा कराना है इसलिए हम बातचीत पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं." बीआरए के विद्रोहियों का संबंध नवाब अकबर बुगटी के परिवार से बताया जाता है जिन्हें तीन साल पहले पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में मार डाला गया था. बलूचिस्तान के इस प्रभावशाली कबीले के लोगों की माँग रही है कि प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों पर पहले वहाँ के स्थानीय लोगों का हक़ है. मुख्य विवाद बलूचिस्तान से निकलने वाली गैस को लेकर है.

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