तस्करी की शिकार बांग्लादेशी महिला

"मेरे बच्चे मुझे याद करके काफ़ी रोते होंगे और अब तो उन्होंने मान लिया होगा कि हमारी माँ मर गई होंगी." ये शब्द 50 वर्षीय नरगिस के हैं जो अपने बच्चों को याद कर रो रही हैं.

नरगिस वह बदनसीब माँ हैं जो 15 साल पहले अपने तीन बच्चों को बांग्लादेश में छोड़ कर पाकिस्तान पहुँची थीं.

वह ढाका में अपने पति और तीन बच्चों को साथ खुशी खुशी जीवन बिता रही थी लेकिन ग़रीबी ने परिवार को काफ़ी परेशान कर रखा था.

एक दिन नरगिस को उनके एक परिचित ने रोज़गार का लालच दिया और झांसा देकर पाकिस्तान ले गया और इस के साथ ही वह तस्करी के रैकेट का शिकार हो गईं.

नरगिस इन दिनों सिंध के उत्तरी ज़िले घोटकी के एक गाँव में रहती हैं. एक 80 वर्षीय किसान ने करीब पंद्रह साल पहले नरगिस को आठ हज़ार रुपए में ख़रीदा था और उनसे शादी कर ली थी.

नरगिस बांग्ला में बात करती हैं और टूटी फूटी सिंधी भाषा भी बोल लेती हैं.

उन्होंने बीबीसी को अपनी कहानी बताई, "मेरे जानने वाले ने मुझे कहा, लाहौर में बहुत रोज़गार है, घरों में काम मिल जाता है और तुम मेरे साथ लाहौर चलो."

उन्होंने कहा, "मेरे शौहर इतना नहीं कमा सकते थे कि बच्चों को भर पेट खाना मिल सके, इसलिए मैं काफी परेशान थी और सोचा कि लाहौर जाकर कुछ पैसा कमा लूँगी और बच्चों को भेजूँगी."

नरगिस को पता नहीं था कि लाहौर बांग्लादेश से इतना दूर है. वे अवैध रूप से बांग्लादेश से भारत पहुँची और कुछ दिन दिल्ली में रहने के बाद लाहौर पहुंचा दी गईं.

पाकिस्तान में महिलाओं की तस्करी एक बहुत बड़ा मुद्दा है और आज भी अवैध तरीक़े से कई महिलाओं की तस्करी की जाती है जिनमें अधिकतर बांग्लादेश से होती हैं. इनमें से ज़्यादातर महिलाओं को वेश्यावृत्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

Image caption सारिम कहते हैं कि बांग्लादेश की ही नहीं पाकिस्तान की महिलाएं भी तस्करी का शिकार है.

नरगिस ने कहा, "जो आदमी मुझे लाहौर तक लेकर आया था, उस ने वहाँ मुझे पांच हज़ार रुपए में एक आदमी को बेच दिया. वह मुझे कराची लेकर आया और उन्होंने छह हज़ार में एक औरत को बेच दिया."

वह औरत नरगिस को सादिक़ाबाद लेकर आईं जो दक्षिण पंजाब का एक शहर है और सिंध के ज़िले घोटकी से काफ़ी क़रीब है जहाँ आजकल नरगिस रह रही हैं.

सादिक़ाबाद में उन को आठ हज़ार रुपए में ज़िला घोटकी के एक किसान को बेचा गया जिन्होंने उन से शादी कर ली.

पाकिस्तान में नरगिस के दो बेटे हैं और उन्होंने दो बार घोटकी से भागने की भी कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुई.

वो हर समय अपने बांग्लादेश वाले बच्चों को याद कर रोती रहती हैं. पाकिस्तान में उन्होंने अपने बड़े बेटे का नाम शाहजहाँ रखा है. बांग्लादेश में भी उनके एक बेटे का यही नाम है.

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में शादी के बाद उन्हें काफी मारा पीटा जाता था और अब उन का पति हर समय उन्हें गालियाँ देता रहता था.

नरगिस के पति से जब पूछा गया कि आप उनको गालियाँ क्यों देते हैं तो उन्होंने कहा, "हम अनपढ़ लोग हैं और इसी तरह से बात करना यहाँ का रिवाज है. यह इन्हें गालियाँ लगती हैं तो मैं क्या कर सकता हूँ".

नरगिस ने कहा कि वो केवल एक बार बांग्लादेश जाने की इच्छा रखती हैं और अपने बच्चों से मिलना चाहती हैं.

ग़ौरतलब है कि ग़ैरसरकारी आँकड़ों के अनुसार अब तक करीब दो लाख बांग्लादेशी महिलाएँ पाकिस्तान में अवैध रूप से लाई गईं हैं और अधिकतर को वेश्यावृत्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

पंजाब में इन महिलाओँ की विशेष मंडियाँ लगाई जाती हैं. दक्षिण पंजाब और उत्तर सिंध के लोग इन मंडियों में आकर शादी के लिए इन औरतो को ख़रीदते भी हैं.

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था अंसार बर्नी ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सारिम बर्नी के अनुसार 80 प्रतिशत महिलाओं को वेश्यावृत्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है और थोड़े बहुत लोग शादी और दूसरे कामों के लिए लड़कियां ख़रीदते हैं.

उन्होंने बताया कि केवल बांग्लादेशी महिलाओं को पाकिस्तान में नहीं लाया जाता बल्कि पाकिस्तानी औरतों को भी अवैध तरीक़े से विदेश भेजा जाता है.

सारिम ने बताया, "मध्य पूर्वी देशों में कई ऐसे मामले हुए हैं जहाँ महिलाओँ ने आत्महत्याएँ की हैं और इसकी वजह यह है कि उन महिलाओँ को रोज़गार का झांसा दे कर पहुँचाया जाता है बाद में वहाँ उन से दूसरे काम करवाते हैं जो वह नहीं करना चाहती हैं."

सारिम के मुताबिक महिलाओं की अधिकतर तस्करी दो मुख्य रास्तों से होती है.जो विदेशी महिलाएँ पाकिस्तान लाई जाती हैं वह बांग्लादेश से भारत के रास्ते आती हैं और ईरान के रास्ते पाकिस्तानी महिलाओँ को मध्यपूर्व और यूरोप लाया जाता है.

सारिम ने कहा कि अगर पाकिस्तान सरकार थोड़ी भी चौकस हो जाए तो महिलाओं की तस्करी को नियंत्रित कर सकती है.

(यह सारी बातचीत नरगिस के पति की मौजूदगी में हुई पर उनके अनुरोध पर उनका और उनके गाँव का नाम नहीं दिया गया है)