महसूद जीवित या मारे गए?

बैतुल्ला महसूद
Image caption बैतुल्ला महसूद अपनी तस्वीर खिचवाने से बचते हैं

अमरीकी और पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि वे पाकिस्तान में तालेबान के प्रमुख नेता बैतुल्लाह महसूद के मारे जाने संबंधी सूचनाओं की जाँच की जा रही है.

इस तरह के संकेत मिल रहे हैं कि वो अपने एक रिश्तेदार के घर पर हुए अमरीकी मिसाइल हमले में मारे गए.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने एक पत्रकार वार्ता में कहा, "हमारे खुफ़िया सूत्रों ने कहा है कि बैतुल्लाह मारे गए हैं लेकिन हमें सबूतों का इंतज़ार है ताकि हम ख़बर की पक्के तौर पर पु्ष्टि कर सकें."

अधिकारियों का कहना है कि ऐसी सूचनाएँ हैं कि बैतुल्लाह महसूद मारे गए लेकिन अभी इस बात के पक्के सबूत नहीं मिले हैं.

एक अमरीकी अधिकारी ने बीबीसी से कहा,'' उनकी मौत की ख़बर सही हो सकती है, इस पर भरोसा किए जाने की वजह हैं, लेकिन अभी इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकती.''

बीबीसी उर्दू सेवा के प्रमुख आमिर अहमद ख़ान का कहना है कि परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर ये नतीजा निकालने की कोशिश की जा रही है कि बैतुल्ला महसूद मारे गए.

उनका कहना था कि अगर इस ख़बर की पुष्टि होती है तो ये अमरीका और पाकिस्तान के लिए थोड़े वक्त के लिए राहत की बात होगी.

हालांकि इसके पहले उनके परिवार के लोगों ने इस बात की पुष्टि कर दी थी कि अमरीकी ड्रोन हमले में बैतुल्लाह की पत्नी की मौत हो गई है.

कौन हैं बैतुल्लाह महसूद

उल्लेखनीय है कि बैतुल्लाह महसूद पाकिस्तान के दक्षिणी वज़ीरिस्तान इलाक़े में तालेबान के प्रमुख नेता माने जाते हैं.

जनवरी, 2007 में पाकिस्तान के मैरियट होटल में हुए आत्मघाती हमले में उनके समर्थकों का हाथ होने का संदेह व्यक्त किया गया था.

उनका नाम पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या से भी जोड़ा गया था. हालांकि उनका कहना था कि बेनज़ीर पर हुए हमले से उनका कोई लेना-देना नहीं था.

ख़बरों के अनुसार बैतुल्लाह के पास लगभग 20 हज़ार तालेबान समर्थक लड़ाके हैं. इनमें से अधिकतर महसूद कबीले से हैं.

ये इलाक़ा अल क़ायदा और तालेबान के लिए सुरक्षित पनाहगाह माना जाता है.

बैतुल्लाह महसूद के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने इस इलाक़े में बड़ी संख्या में उन लड़ाकों को पनाह दी जो अफ़ग़ानिस्तान में हमले करते हैं.

इसमें आत्मघाती धमाके और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सेना के ख़िलाफ़ सीमा पार से हमले करना शामिल है.

पाकिस्तानी सेना ने दक्षिण वज़ीरिस्तान के इस इलाक़े को चरमपंथियों से मुक्त कराने के लिए पहले भी कई अभियान चलाए लेकिन कामयाबी नहीं मिली.

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