मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

Image caption मुशर्रफ़ ने अगस्त 2008 में इस्तीफ़ा दे दिया था

पाकिस्तान में पुलिस ने वरिष्ठ जजों को अवैध तरीके से हिरासत में रखने के सिलसिले में पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है.

सोमवार को इस्लामाबाद के अतिरिक्त ज़िला और सत्र न्यायाधीश अब्दुल वकील ख़ान ने पुलिस को ये आदेश दिया था.

मुशर्रफ़ पर आरोप है कि उन्होंने आपातकाल लगाने के बाद वर्ष 2007 में सुप्रीम कोर्ट के जजों को हिरासत में रखने का आदेश दिया था. ये वो जज थे जिन्होंने आपातकाल के दौरान शपथ ग्रहण करने से मना कर दिया था और उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया था.

पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुशर्रफ़ का क़दम असंवैधानिक था.

एक साल पहले महाभियोग से बचने के लिए मुशर्रफ़ ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और अब वे ब्रिटेन में रहते हैं.

एएफ़पी ने पुलिस प्रवक्ता हाकिम खान के हवाले से लिखा है, "हमने पाकिस्तानी पीनल कोड के तहत मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है."

बीबीसी संवाददाता हारून रशीद का कहना है कि सज़ा मिलने की आशंका को देखते हुए इस बात के आसार कम ही हैं कि पूर्व राष्ट्रपति आने वाले समय में देश लौटेंगे.

संवाददाता के मुताबिक मुशर्रफ़ को तीन साल की जेल की सज़ा हो सकती है.

'असंवैधानिक'

पूर्व में आपातकाल लगाने के फ़ैसले का मतलब है कि उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला भी चल सकता है क्योंकि संविधान के तहत अगर कोई इसके मूल्यों के ख़िलाफ़ काम करता है तो उसे सज़ा दी जा सकती है.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में स्पष्ट कर दिया था कि मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला चलना चाहिए या नहीं इसपर बहस करने के लिए संसद सबसे उपयुक्त माध्यम है.

जिन जजों को 2007 में मुशर्ऱफ़ ने बर्ख़ास्त किया था अब वे दोबारा पद संभाल चुके हैं जिनमें मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिखार चौधरी भी शामिल है.

उन्हें निलंबित किए जाने के बाद से ही विरोध प्रदर्शन शुरु हुए थे और आख़िरकर मुशर्रफ़ को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा था.

उन्हें अंतत आपातकाल भी हटाना पड़ा था और आम चुनाव करवाए गए जिसमें मुशर्रफ़ की सहयोगी पार्टियाँ हार गई थीं.

मुशर्रफ़ अगस्त 2008 में इस्तीफ़ा देने पर मजबूर हो गए थे. हालांकि वे कहते रहे हैं कि चरमपंथ से निपटने के लिए ये क़दम उठाने ज़रूरी थे.

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