'बलावरिस्तान खाली करे पाक'

अब्दुल हमीद खान
Image caption अब्दुल हमीद पिछले दिनों जयपुर आए हुए थे.

पाकिस्तान प्रशासित बलावरिस्तान के एक निर्वासित नेता और बलावरिस्तान नेशनल फ्रंट के चेयरमैन अब्दुल हमीद खान ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से गिलगित, बलिस्तां, चित्राल और शहेनाकी कोहिस्तान के लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार दिलाने में मदद की गुहार की है.

खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की फौज ने जबरन इस इलाक़े पर कब्ज़ा कर रखा है और इसमें कुछ हिस्सा भारत का भी है मगर पाकिस्तान चीन से हाथ मिला कर उस इलाक़े पर अपना अधिकार जमाए हुए है.

खान पिछले कई सालों से बेल्जियम में शरण लिए हुए है और अपने इलाक़े की आज़ादी के लिए अभियान चला रहे है.

भारत में अपने दौरे के तहत जयपुर आए खान ने बीबीसी से कहा, ‘‘भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है. लिहाजा भारत को बलावरिस्तान के अवाम की सहायता करनी चाहिए.’’

उनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत पाकिस्तान को तुंरत अपनी फौज बलावरिस्तान से हटानी चाहिए.

खान कहते है कि इलाक़े की यूँ तो आबादी महज बीस लाख है और इसका क्षेत्रफल एक लाख वर्ग किलोमीटर है. साथ ही इस क्षेत्र में कुदरती संसाधन बहुत हैं और इसका सामरिक महत्व भी है.

खान को आपत्ति है कि की पाकिस्तान इस इलाके को नॉर्थन एरिया ऑफ पाकिस्तान कहता है जबकि पाकिस्तान का इस पर कोई क़ानूनी अधिकार नहीं है.

वो कहते हैं, ‘‘हमारा आंदोलन शांतिपूर्वक है. हम हिंसा नहीं चाहते हैं. हमारे लोग नागरिक अधिकारों से वंचित है. हमारा दमन किया जा रहा है. पाकिस्तान कश्मीर की बात तो करता है, मगर बलावरिस्तान के मामले में उसका रुख बिलकुल अलग है. हम चाहते हैं पाकिस्तान इस इलाक़े को खाली करे.’’

खान के मुताबिक पाकिस्तान ने गलत ढंग से चित्राल और शहेनाकी कोहिस्तान को अपने साथ मिला लिया जबकि गिलगित-बालतिस्तान अभी भारतीय हिस्से वाले जम्मू और कश्मीर का भाग है.

वो कहते है चीन और पाकिस्तान दोनों इस हिस्से में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य कर रहे है. पाकिस्तान इस इलाक़े में छह बड़े बाँध बना रहा है.

वो कहते हैं कि भारत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की बात तो करता है जबकि वो महज चार हजार वर्ग मील है. लेकिन इतने बड़े हिस्से पर उसका कोई ध्यान नहीं है.