अफ़गान घटनाचक्र 1

पहाड़ियों से घिरा और मध्य पूर्व, मध्य एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के बीच स्थित अफ़ग़ानिस्तान भौगोलिक नज़रिए से बहुत ही अहम है. सदियों से विदेशी सेनाएँ यहाँ आकर इस पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश करती रही हैं.

लेकिन ज़्यादातर सेनाओं को यहाँ के पहाड़ो और कबायली गुटों के आगे हार माननी पड़ी है. जनजातीय, धार्मिक और क्षेत्रीय प्रतिद्वंदिता के कारण राजधानी काबुल के बाहर यहाँ की सरकारों के लिए भी शासन करना बड़ी चुनौती रही है.

अफ़ग़ानिस्तान के घटनाचक्र पर एक नज़र

19वीं सदी में ब्रिटेन और रूस के बीच अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़े के लिए संघर्ष रहा.

1919- ब्रिटेन के ख़िलाफ़ जंग के बाद अफ़गानिस्तान दोबारा आज़ाद हुआ

1926- अमनउल्लाह ने ख़ुद को राजा घोषित किया और समाज सुधार लागू किए

1929- सुधारों के विरोध के बाद अमनउल्लाह देश छोड़कर भागे

1933- ज़हीर शाह राजा बने और अफ़ग़ानिस्तान में अगले चार दशकों तक राजशाही

1953- जनरल मोहम्मद दाउद प्रधानमंत्री बने. आर्थिक और सैन्य सहायता के लिए सोवियत संघ का रुख. पर्दा जैसे रिवाज़ों पर पाबंदी लगाई

1963- मोहम्मद दाउद को इस्तीफ़ा देना पड़ा.

1973- मोहम्मद दाउद तख़्ता पल्ट कर सत्ता पर काबिज़ हुए और अफ़ग़ानिस्तान को गणराज्य घोषित किया. सोवियत संघ को अन्य पश्चिमी देशों के सामने खड़ा करने की कोशिश. उनकी शैली ने उन्हें दक्षिणपंथी गुटों से अलग-थलग किया.

1978- पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने तख़्ता पल्टा, मोहम्मद दाउद की हत्या. लेकिन पार्टी के दो गुटों खल्क़ और परचम में मतभेद. समाज सुधारों के खिलाफ़ रहे कट्टरवादी इस्लामिक नेताओं ने सैन्य विद्रोह शुरु किया.

1979- दक्षिणपंथी विचारधारा वाले नेताओं हफ़ीजउल्लाह अमीन और नूर मोहम्मद के बीच सत्ता संघर्ष.विद्रोह के बाद अफ़ग़ान सेना ने घुटने टेके. सोवियत संघ ने अमीन को हटाने के लिए सेना भेजी, अमीन की हत्या.

सोवियत संघ का दख़ल

1980- पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी( परचम गुट) के नेता.......सोवियत समर्थन से देश के नेता बने. लेकिन सोवियत सेना का विरोध तेज़ हुआ. अमरीका, चीन, पाकिस्तान,ईरान और सउदी अरब ने विद्रोहियों को पैसा और हथियार दिए.

1985- पाकिस्तान में मुजाहिद्दीन सोवियत संघ के ख़िलाफ़ एकजुट हुए. युद्ध के कारण आधा अफ़ग़ानिस्तान विस्थापित. नए सोवियत नेता मिखाइल गर्वाचोफ़ ने कहा वे अपनी सेना को वापस बुलाएँगे.

1986- अमरीका ने मुजाहिद्दीनों को स्टिंगर मिसाइल दिए, नजीबुल्लाह सोवियत समर्थित सरकार के नेता बने.

1988- अमरीका, सोवियत संघ, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान ने शांति समझौता किया. सोवियत सेनाओं ने हटना शुरु किया

1989- सोवियत सेना हटी लेकिन गृह युद्ध जारी. नजीबुल्लाह को हटाने के लिए मुजाहिद्दीनों का संघर्ष जारी.

1991- अमरीका और सोवियत संघ ने अफ़ग़ानिस्तान में दोनों पक्षों को मदद बंद करने का फ़ैसला किया.

मुजाहिद्दीनों की जीत

1992- नजीबुल्लाह सत्ता से बेदखल. सोवियत सेना हटने के बाद अफ़ग़ानिस्तान पर शासन के लिए मिलिशिया गुटों में आपसी संघर्ष.

1993- मुजाहिद्दीन गुट सरकार बनाने पर सहमत. ताजिक समुदाय के बुरहानुद्दीन रब्बानी राष्ट्रपति बने.

1994- पशतूनों के प्रभुत्व वाला तालेबान रब्बानी सरकार को चुनौती देने लगा.

1996- तालेबान ने काबुल पर क़ब्ज़ा किया. इस्लाम का कट्टरवादी नज़रिया लागू किया. महिलाओं के काम करने पर पाबंदी, पत्थर मार-मार कर हत्या करने की प्रथा. रब्बानी ने तालेबान विरोधी नॉर्दन एलायंस से हाथ मिलाया.

तालेबान पर दबाव

1997- पाकिस्तान और सऊदी अरब ने 'तालेबान सरकार' को मान्यता दी, ज़्यादातर देशों ने रब्बानी को राष्ट्राध्यक्ष माना. दो तिहाई अफ़ग़ानिस्तान पर तालेबान का क़ब्ज़ा.

1998- भूकंप से लाखों की मौत. अमरीका ने ओसामा बिन लादेन के संदिग्ध ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. अमरीका का आरोप कि उसन अफ़्रीका में अमरीकी दूतावासों पर हमले किए.

1999- संयुक्त राष्ट्र ने अफ़ग़ानिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए ताकि वो ओसामा बिन लादेन को मुकदमे के लिए सौंप दे.

2001- बामियान बुद्ध प्रतिमाओं को तालेबान ने नष्ट किया. तालेबान ने अल्पसंख्यकों से कहा कि वे ऐसी कोई पहचान रखें जिस पर लिखा गया हो कि वे ग़ैर-मुस्लिम हैं. हिंदू औरतों से पर्दा करने के लिए कहा गया. तालेबान का विरोध करने वाले नेता अहमद शाह मसूद की हत्या. अमरीका में न्यूयॉर्क पर हमला.

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