अफ़ग़ान चुनाव में भ्रष्टाचार का साया

बीबीसी की एक पड़ताल में अफ़ग़ानिस्तान में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में धांधली और भ्रष्टाचार के सबूत मिले हैं.

हज़ारों मतदाता कार्ड बिक रहे हैं और वोट ख़रीदने के लिए हज़ारों डॉलर की घूस दी जा रही है.

यह बात उस समय सामने आई है जब गुरुवार को चुनाव होने वाले हैं जिसमें मौजूदा राष्ट्रपति हामिद करज़ई 30 से अधिक प्रतिद्वंद्वियों का सामना कर रहे हैं.

पश्चिमी देशों के अधिकारियों ने कहा है कि ये चुनाव सही नहीं होंगे लेकिन उनका कहना है कि चुनाव न होने से ये फिर भी ठीक हैं.

धाँधली

बीबीसी के लिए काम कर रहे एक अफ़ग़ान नागरिक ने मतदाता बनकर इन ख़बरों की पड़ताल की है कि मतदाता कार्ड बेचे जा रहे हैं.

उन्हें दस डॉलर (पाँच सौ रुपए) प्रति मतदाता पत्र की दर से एक हज़ार मतदाता कार्ड बेचने का प्रस्ताव मिला. कुछ और लोगों ने भी उन्हें इसी तरह का प्रस्ताव दिया.

काबुल में मौजूद बीबीसी के इयान पैनल का कहना है कि यह जानना संभव नहीं है कि इस तरह के कितने मतदाता कार्ड बेचे जा चुके हैं लेकिन उनका कहना है कि इस सिलसिले में कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कुछ व्यक्तियों के नाम पर कई मतदाता कार्ड जारी किए गए हैं और अनेक सरकारी कर्मचारियों ने अवैध रुप से कुछ प्रत्याशियों के पक्ष में चुनाव प्रचार किया है.

उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के एक प्रभावशाली क़बायली नेता ने कहा है कि प्रचार करने वाली टीमों ने उन्हें अपने प्रभाव वाले वोटों को एकमुश्त उन्हें दिलवाने के बदले हज़ारों डॉलर देने का प्रस्ताव किया गया.

इन चुनावों की निगरानी करने वाली एक स्वतंत्र संस्था का कहना है कि उसने चुनाव आयोग के सामने भ्रष्टाचार के सबूत रखे थे लेकिन अधिकारियों ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की.

लेकिन पश्चिमी देशों के अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है कि ये चुनाव वास्तविक न हों और अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव का स्तर वैसा न हो, जैसा कि अन्य जगह पर होता है, लेकिन वहाँ चुनाव न होने से यह अच्छा है.

इन चुनावों में करज़ई 30 से अधिक प्रतिद्वंद्वियों का सामना कर रहे हैं.

सोमवार को करज़ई के क़रीबी क़बायली नेता जनरल अब्दुल राशिद दोस्तम तुर्की से काबुल पहुँचे जिससे कि वे अंतिम चुनाव रैली में करज़ई के प्रति समर्थन जता सकें.

अमरीका और संयुक्त राष्ट्र दोनों ने दोस्तम की काबुल वापसी पर चिंता जताई है. उनको दोस्तम के अगली सरकार में संभावित भूमिका को लेकर भी चिंता है.

करज़ई के मंत्री रह चुके दो और उम्मीदवारों ने भी सोमवार को अपनी अंतिम रैलियाँ कीं.

हिंसा

अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब वहाँ हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है.

Image caption देश के दक्षिणी हिस्से में तालेबान का बड़ा प्रभाव है

तालेबान लड़ाकों ने धमकी दी है कि वे ऐसे हर व्यक्ति पर हमला करेंगे जो चुनावों में हिस्सा लेगा.

ऐसा माना जा रहा है कि इन धमकियों की वजह से चुनावों में मतदान का प्रतिशत कम रह सकता है.

बीबीसी के अफ़ग़ान सेवा के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि देश के 30 प्रतिशत हिस्से में या तो सरकार का बहुत कम प्रभाव है या फिर कोई प्रभाव ही नहीं है.

रिपोर्टरों की जानकारियों के आधार पर किए गए इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि ज़िलों के 40 प्रतिशत हिस्सों में सरकार सुरक्षा या कोई और सेवा उपलब्ध ही नहीं करवाती.

इनमें से ज़्यादातर ज़िले दक्षिण में हैं जहाँ तालेबान के अधिकतर हमले हुए हैं.

लेकिन सरकार इस सर्वेक्षण के नतीजों से सहमत नहीं थी और उसका कहना था कि सुरक्षा की समस्या कुछेक ज़िलों में ही है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि हालांकि अब चुनाव में भ्रष्टाचार सामने आ चुका है लेकिन सबसे बड़ा मसला अभी भी तालेबान हैं, जिनकी वजह से ये चुनाव सामान्य नहीं रह गए हैं.

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