माधव नेपाल भारत के दौरे पर

नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल मंगलवार से पाँच दिनों की भारत की यात्रा पर हैं. प्रधानमंत्री बनने के बाद वे पहली बार भारत आ रहे हैं.

माना जा रहा है कि इस दौरान वे भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ द्विपक्षीय रिश्तों समेत कई मुद्दों पर बात करेंगे. उनके साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी है.

माधव नेपाल भारत के विदेश मंत्री से भी मिलेंगे. व्यापार और निवेश के अलावा, प्रत्यर्पण संधि, 1950 की मैत्री संधि, नेपाल में शांति प्रक्रिया और भूटान की शरणार्थी समस्या पर भी बात होने की संभावना है.

भारत की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “भारत और नेपाल के बीच अनोखा संबंध रहा है. दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक रिश्ता है. नेपाल के प्रधानमंत्री के भारत दौरे से दोनों देशों का एक मौक़ा मिलेगा कि वो विभिन्न मुद्दों पर बातचीत कर सकें.”

इससे पहले दोनों देशों के नेता मिस्र में गुट निरपेक्ष सम्मेलन के दौरान मिले थे.

भारत-नेपाल संबंध

नेपाल में भारत के राजदूत रह चुके देब मुखर्जी का कहना है कि अगर निवेश को लेकर समझौता होता है तो ये नेपाल के लिए महत्वपूर्ण होगा.

देब मुखर्जी ने बीबीसी से हुई बातचीत में भारत-नेपाल रिश्तों पर कहा, “नेपाल में हमेशा भारत को अपने अंदरूनी राजनीति में लाया जाता रहा है. इससे किसी भी देश का फ़ायदा नहीं है. माओवादियों की संसद में करीब 40 फ़ीसदी सीटें हैं ये तो मानना पड़ेगा. भारत के साथ रिश्ते सुधारने के लिए वहाँ सर्वसम्मति होना ज़रूरी है. अभी तक देखा गया है कि अगर कोई प्रधानमंत्री आगे बढ़ना चाहता है तो उन्हें रोका जाता है. माधव नेपाल के पास भी बहुमत नहीं है. उन्हें भी सोच समझकर ही आगे बढ़ना होगा.”

वहीं पीटीआई के मुताबिक माओवादियों ने माधव नेपाल को चेतावनी दी है कि वो भारत के साथ किसी बड़ी संधि पर हस्ताक्षर न करे क्योंकि उनकी सरकार विवादित हालातों में बनी थी.

बाबूराम भट्टाराई ने कहा है कि हालांकि वे सभी पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं लेकिन भारत दौरे के दौरान माधव नेपाल को कोई बड़ा समझौता नहीं करना चाहिए.

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के नेता माधव कुमार नेपाल ने गत मई में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी.

माधव नेपाल की पार्टी नेकपा-एमाले के नेतृत्त्व में बनी सरकार को 601 में से 356 सांसदों का समर्थन मिला हुआ है.

सेना प्रमुख को हटाने के मुद्दे पर नाराज़गी के बाद माओवादी सरकार के नेता प्रचंड ने इस्तीफ़ा दे दिया था. उसके बाद माधव नेपाल प्रधानमंत्री बने थे.

संबंधित समाचार

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है