'तालेबान को हराना आसान नहीं'

ओबामा
Image caption ओबामा के मुताबिक तालेबान के ख़िलाफ़ लड़ाई लंबी खिंच सकती है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि तालेबान पर जीत का कोई आसान रास्ता नहीं है और न ही ये जल्दी संभव है.

उनका ये बयान ऐसे समय में आया है जब अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं.

चुनाव के लिए प्रचार ख़त्म हो चुका है और दो दिन बाद यानी बीस अगस्त को मतदान होना है.

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी अभियान के लिए समर्थन जुटाने के लिए एरिज़ोना में आयोजित एक रैली में राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में संघर्ष एक आवश्यकता थी और इसका कोई विकल्प नहीं था.

उनका कहना था कि ये संघर्ष अमरीका को आतंकवाद से बचाने के लिए ज़रूरी था.

बीबीसी के वाशिंगटन संवाददाता का कहना है कि ऐसा लगता है कि बराक ओबामा अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी के लंबे समय तक जमे रहने के लिए जनसमर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं.

जुलाई महीने में अफ़ग़ानिस्तान में चौवालीस अमरीकी सैनिक मारे गए हैं और एक जनमत सर्वेक्षण के अनुसार इस अभियान के समर्थन में गिरावट आई है.

राष्ट्रपति चुनाव

अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव के लिए प्रचार के अंतिम दिन उम्मीदवारों ने मतदाताओं का विश्वास हासिल करने की ज़ोरदार कोशिश की है.

Image caption राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रचार ख़त्म हो गया है.

देश में हिंसा और तालेबान की धमिकयों के बीच कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति चुनाव कराए जा रहे हैं जिसके लिए 20 अगस्त को मतदान होगा.

बीबीसी की अफ़ग़ान सेवा ने एक सर्वेक्षण किया है जिसके मुताबिक़ देश के 30 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर सरकार का या तो बहुत कम नियंत्रण है या बिल्कुल भी नहीं है.

हिंसा की आशंका की वजह से राष्ट्रपति चुनाव में इस बार कम ही मतदान की संभावना व्यक्त की जा रही है लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि लोकतंत्र की जड़ें देश में धीरे-धीरे जम रही हैं.

इन चुनावों में मौजूदा राष्ट्रपति हामिद करज़ई के मुक़ाबले 30 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं जिनमें दो पूर्व मंत्री भी शामिल हैं.

राष्ट्रपति करज़ई को मुख्य चुनौती पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मिल रही है, इस बार के चुनाव में हामिद करज़ई के कार्यकाल की उपलब्धियों और नाकामियों पर ख़ासा ज़ोर दिया जा रहा है.

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