छिटपुट हिंसा के बीच मतदान जारी

मतदान करते हामिद करज़ई
Image caption हामिद करज़ई दूसरी बार राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हैं

अफ़ग़ानिस्तान में कड़ी सुरक्षा और छिटपुट हिंसा के बीच राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान चल रहा है.

शुरुआती दौर में देश भर में मतदान धीमा ही दिखा है.

वहाँ तालेबान विद्रोहियों ने मतदान के दौरान विघ्न डालने की धमकी दी है और चुनाव से ठीक पहले तक अनेक हमले भी हुए हैं.

इस चुनाव को देश में लोकतंत्र के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

वर्तमान राष्ट्रपति हामिद करज़ई के अलावा 30 अन्य उम्मीदवार मैदान में हैं. उन्हें अपने दो पूर्व मंत्रियों अब्दुल्ला अब्दुल्ला और अशरफ़ ग़नी से कड़ी चुनौती मिल रही है.

हिंसा

राजधानी काबुल में कई जगह मतदान केंद्रों पर हमले हुए हैं.

इसके अलावा मतदान शुरु होने के बाद कई अन्य शहरों में रॉकेट हमले हुए हैं.

बुधवार की रात और गुरुवार की सुबह कंधार में कुछ विस्फोटों की ख़बरें मिली हैं. वहाँ मौजूद बीबीसी उर्दू के संवाददाता अयूब तरीन के अनुसार इनमें जानमाल के नुक़सान की कोई ख़बर नहीं है.

सुरक्षा अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के तख़ार प्रांत में दो आत्मघाती हमलावरों को पकड़ा गया है.

वहीं काबुल में मौजूद बीबीसी हिंदी की संवाददाता रेणु अगाल का कहना है कि काबुल में सुरक्षा के भारी इंतज़ाम किए गए हैं लेकिन सुबह मतदान शुरु होने के समय मतदान केंद्रों पर मतदाता नज़र नहीं आ रहे थे. धीरे-धीरे वे मतदान केंद्रों तक पहुँच रहे हैं.

इस चुनाव में एक करोड़ 70 लाख मतदाता 6969 मतदान केंद्रों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं. उनकी सुरक्षा के लिए तीन लाख अफ़ग़ान और विदेशी सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.

चुनाव पूर्व हुए कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार हामिद करज़ई मतदाताओं के लगभग 45 प्रतिशत समर्थन के साथ चुनाव में आगे हैं जबकि पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला 25 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर हैं.

राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने अफ़ग़ान नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे 'देश की स्थिरता, शांति और प्रगति के लिए मतदान करें.'

बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है, "इस क्षेत्र की व्यापक समझ रखने वाले पर्यवेक्षक अहमद रशीद ने कहा है कि राजनीतिक स्थिरता के लिए क़ानूनी वैधता चाहिए और इसके लिए सबसे ज़रूरी है क़ानूनी तौर पर वैध सरकार का स्थापित हो."

संयुक्त राष्ट्र, करज़ई की अपील

चुनाव से पहले सुरक्षाकर्मियों ने काबुल में एक बैंक पर हमला करने वाले तीन संदिग्ध चरमपंथियों को मार दिया. मंगलवार को देश में हुए विभिन्न हमलों में 20 से ज़्यादा लोग मारे गए जिनमें काबुल में हुआ एक आत्मघाती हमला भी शामिल है.

उधर संयुक्त राष्ट्र ने सरकार के उस फ़ैसले की कड़ी आलोचना की है जिसमें मीडिया पर मतदान के दिन हिंसक घटनाओं की जानकारी देने पर प्रतिबंध लगाया गया था.

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस प्रतिबंध को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है,"इस मतदान में भाग लेकर अफ़ग़ान नागरिक देश के राजनीतिक जीवन में ताज़ा जोश लाएँगे और देश में शांति और प्रगति के बारे में अपनी प्रतिबद्धता जताएँगे."

उधर राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है, "हम अपने सभी नागरिकों से अनुरोध कर रहा हूँ, फिर वो जहाँ कहीं भी हों - गाँवों में, घरों में, दूरदराज़ के इलाक़ों में कि वे बाहर आएँ और लाखों की संख्या में मतदान में भाग ले...ये हम सभी के लिए अच्छा होगा."

क्यों अहम हैं ये चुनाव?

जोनाथन मार्कस का कहना है कि ये चुनाव अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य के लिए बहुत अहम हैं.

उनका कहना है, "यदि ओबामा प्रशासन के अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता लाने के प्रयासों सफल होना है तो सबसे पहले ज़रूरी है कि लोकतांत्रिक तरीके से अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति को दोबारा शासन चलाने का अधिकार मिले... लेकिन सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि स्थानीय अफ़ग़ान इन चुनावों को किस तरह से देखते हैं..."

उनका आकलन है कि कई हलकों में डर है कि मतदाता बड़ी संख्या में बाहर नहीं आते या फिर चनावों में स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आता तो इस अंतराल में प्रभावी सत्ता के अभाव में कार्यकुशलता और निर्णायक शासन पर असर पड़ेगा.

बीबीसी संवाददाता रेणु अगाल का कहना है कि मतदाताओं से वोट देने की अपील लाज़िमी है क्योंकि अगर हामिद करज़ई या किसी और को राष्ट्रपति चुना जाना है तो उन्हें कम से कम 51 प्रतिशत मतों की ज़रुरत होगी.

अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो फिर से मतदान की नौबत आएगी.

वहीं लंदन में दक्षिण एशियाई मामलों के जानकार नजम अब्बास का कहना है कि यदि लाखों अफ़ग़ान सुरक्षा कर्मियों और 70 हज़ार नैटो सैनिकों के बावजूद अगर लोग वोट देने नहीं निकलते हैं तो यह सोचने की बात होगी.

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