'भरोसा जीतने के पर्याप्त प्रयास नहीं हुए'

इराक़
Image caption इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेनाएँ तैनात हैं

अमरीका के सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी एडमिरल माइक मुलेन ने कहा है कि अमरीका मुस्लिम जगत में दोस्त बनाने और विश्वसनीयता कायम करने में इसलिए मुश्किलों का सामना कर रहा है क्योंकि उसने रिश्ते कायम करने के उतने प्रयास नहीं किए जितने किए जाने चाहिए थे और कई बार उसने अपने वादे भी नहीं निभाए.

समाचार एजेंसियों के अनुसार अमरीकी सैन्य पत्रिका ज्वाइंट फ़ोर्स क्वाटर्ली में एडमिरल माइक मुलेन ने खुलकर अपने विचार व्यक्त किए हैं और मुस्लिम जगत में अमरीका और अमरीकी सेनाओं के प्रति विश्वास के अभाव, मुश्किलों और इसके कारणों पर चर्चा की है.

एडमिरल मुलेन का कहना है, "हमारी सबसे बड़ी समस्या गुफ़ाएँ नही हैं...विश्वसनीयता है. हमारे संदेशों में विश्वास का अभाव है क्योंकि हमने भरोसा कायम करने और रिश्ते बनाने के उतने प्रयास नहीं किए हैं जितने किए जाने चाहिए थे....और अनेक बार हमने अपने वादे भी नहीं निभाए हैं."

'बहुत सफ़र तय करना है'

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार उन्होंने लिखा है, "हमें इस बारे में इतनी चिंता करने की ज़रूरत नहीं कि हम अपने काम के बारे में किस तरह से बताते हैं बल्कि इस बारे में सोचने की ज़रूरत है कि हमारी कारगुज़ारी हमारे बारे में क्या बताती है."

अमरीकी सेनाएँ इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में तैनात हैं. एडमिरल मुलेन ने माना है कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्ता जैसे देशों में असली विश्वास कायम करने के बारे में बहुत सफ़र तय करना पड़ेगा.

वे कहते हैं, "अभी बहुत सफ़र तय करना है. मुस्लिम समुदाय बहुत ही गूढ़ दुनिया है जिसे हम पूरी तरह से नहीं समझते....और कई बार पूरी तरह से समझने की कोशिश भी नहीं करते."

उन्होंने लिखा है कि अफ़ग़ानिस्तान में 'तालेबान की क्रूरता और मानव जीवन को नज़रअंदाज़ करने' के बावजूद उसके अभियान को कुछ सफलता इसलिए मिली है कि उसने समस्याओं के पुख़्ता हल दिए हैं, केवल बातें नहीं बनाईं.

अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के संदर्भ में एडमिरल मुलेन ने लिखा है, "आपकी कोई प्रशासनिक समस्या है? तालेबान इस बारे में काफ़ी कार्यकुशल बन रहा है. उन्होंने कुछ जगहों पर अदालतें बनाई हैं, कर लगाए हैं और एकत्र किए हैं और लोगों को स्थानीय नेताओं के ख़िलाफ़ शिकायतें दर्ज करने का अधिकार भी दिया है."

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार एडमिरल मुलेन ने लिखा है, "हम तब अपना ज़्यादा नुकसान करते हैं जब ऐसा प्रतीत होता है कि हम केवल श्रेय लेने के लिए काम कर रहे हैं. हम अपना ज़्यादा नुकसान करते हैं जब हमारी कथनी और करनी में अंतर होता है...रणनीतिक संचार की अधिकतर समस्याएँ संदेश पहुँचाने की समस्याएँ होती ही नहीं...ये नीति और उसको लागू करने की समस्याएँ होती हैं."

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