श्रीलंका के पत्रकार को जेल

श्रीलंकाई पत्रकार को सज़ा
Image caption तिसानायगम को मार्च में हिरासत में लिया था.

श्रीलंका की एक अदालत ने एक प्रमुख तमिल पत्रकार तो 20 साल की जेल की सज़ा सुनाई है. उन पर आतंकवाद निरोधी क़ानून के तहत मुक़दमा चला था.

पत्रकार जेएस तिसायनायगम को उच्च अदालत के जज दीपाली विजयसुंदरा ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का दोषी पाया.

तिसायनायगम को 2008 में हिरासत में लिया गया था और उनपर अब बंद हो चुकी मासिक पत्रिका, 'द नॉर्थ ईस्ट मन्थली' में हिंसा उकसाने वाले लेख लिखने का आरोप लगाया गया था.

उन पर तमिल विद्रोहियों से धन मिलने के आरोप भी लगे थे.

एलटीटीई से संबंध

अदालत के एक अधिकारी के अनुसार तिसायनायगम को जातिवादी हिंसा भड़काने और आतंकवाद का समर्थन करने का दोषी पाया गया.

अदालत का मानना था कि अपनी वेबसाइट चलाने के लिए उन्हें तमिल छापामार संगठन लिबरेशन टाइगर ऑफ़ तमिल ईलम (एलटीटीई) से धन मिला था.

तिसानायगम के मामले की श्रीलंका में बहुत चर्चा हुई है. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने उनकी रिहाई की मुहिम चलाई.

उनका कहना है कि श्रीलंका सरकार आतंकवाद निरोधी क़ानून का इस्तेमाल शांतिपूर्ण आलोचकों का मुंह बंद करने के लिए कर रहा है.

तिसानायगम को पाँच महीने से ज़्यादा जेल की सज़ा काटनी पड़ी और फिर उनपर सरकार को बदनाम करने वाली पत्रिका के प्रकाशन और वितरण का दोषी पाया गया.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि श्रीलंका पत्रकारों के लिए दुनिया में सबसे ख़तरनाक जगहों में से एक है.

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है