'मालदीव के लोगों को भी जीने का हक़ है'

मोहम्मद नाशीद

मालदीव हिंद महासागर में 12 सौ द्वीप पर आधारित तीन लाख आबादी वाला देश है

ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से अगर समुद्र की सतह में इज़ाफ़ा होता है तो मालदीव इस धरती से मिट सकता है, लेकिन आर्थिक समस्याओं की वजह से देश के राष्ट्रपति जलवायु परिवर्तन पर यूरोप में होने वाले सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले सकेंगे.

राष्ट्रपति मोहम्मद नशहीद कहते हैं कि वो कोपेनहेगन में होने वाले सम्मेलन में उसी स्थिति में भाग लेंगे जब कोई उनके आने-जाने का ख़र्च उठाने को तैयार हो.

मालदीव हिंद महासागर में द्वीपों पर आधारित तीन लाख आबादी वाला देश है जिसकी अधिकतर आबादी मुसलमान है. अधिकतर द्वीपों पर आबादी नहीं है. जम़ीन की सतह समुद्र से सिर्फ़ ढेड़ मीटर ऊपर है. राष्ट्रीय आमदनी का लगभग सारा भार मछली पालन और पर्यटन पर है. सरकार का कहना है कि उसे सख़्त आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है.

इस पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति मोहम्मद नशहीद ने पिछले साल अक्तूबर में सत्ता संभाली थी.

राष्ट्रपति मोहम्मद नशहीद से हुई बातचीत के अंश:

क्या स्थिति इतनी ख़राब हैं कि आप कोपेनहेगन के सम्मेलन में भी भाग नहीं ले सकते?

कई बरसों से हमारे देश में पैसे का ग़लत इस्तेमाल किया गया. हमें इस स्थिति को संभालना है और बेहतर बनाने के लिए बचत की आवश्यकता है. हमें अपने बजट को संभालने और लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए भारत के अलावा किसी से कोई मदद नहीं मिली है. इसलिए हमें अपने स्रोत से ही काम चलाना पड़ता है.

मैं लोगों की यह बात समझ सकता हूँ कि कोपेनहेगन जाने पर 50 हज़ार डॉलर से अधिक ख़र्च नहीं होंगे, लेकिन सिर्फ़ मेरे दौरे की बात नहीं है. हमें दूसरे मंत्री और उच्च सरकारी अधिकारियों के लिए उदाहरण पेश करना है. इसलिए मैंने फ़ैसला किया है कि जबतक यात्रा का ख़र्च कोई और नहीं उठाएगा, मैं विदेश का दौरा नहीं करुंगा.

लेकिन राष्ट्रपति साहब, क्या यह कहना ग़लत नहीं होगा कि इस फ़ैसले से आप दुनिया का ध्यान मालदीप पर केंद्रीत करने की कोशिश कर रहे हैं और बचत से इसका कोई सरोकार नहीं है.

नहीं, ये सही नहीं है. ये पब्लिसिटी हासिल करने की कोशिश नहीं है. ये बचत कम करने की कोशिशों का हिस्सा है. ये वास्तविकता पर आधारित क़दम है जो सरकार ने नीतियों और बजट की कमी के कारण उठाया गया है.

आपने यह भी कहा है कि अगर कोई और यात्रा ख़र्च उठाता है तो आप कोपेनहेगन जाने को तैयार हैं. जब आपने ये बात कही तो आपके मन में कौन था?

कोई भी दोस्त. मेरे दिमाग़ में कोई विशेष व्यक्ति नहीं था. अगर कोई ख़र्च उठाने के लिए आगे आता है तो बहुत अच्छा होगा.

कम ख़र्च करने का अबतक क्या असर सामने आया है? जैसे आपने राष्ट्रपति भवन में नहीं रहने का फ़ैसला किया था, इसका कोई फ़ायदा हुआ?

मालदीप

मालदीप के अधिकतर द्वीपों पर आबादी नहीं है

मालदीव में 65 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति को अब दो हज़ार रुपए पेंशन दी जा रही है. इस काम के लिए 43.2 करोड़ रुपए रखे गए हैं. ये पैसा हमने राष्ट्रपति भवन को इस्तेमाल नहीं करने से बचाया है.

जहाँ तक जलवायु परिवर्तन का सवाल है, आपने कहा है कि जो कुछ करना है वो मालदीप को ही करना है, लेकिन यह एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है इसमें मालदीप अकेला कैसे रह सकता है?

मेरा मतलब था कि इस स्थिति से निटने के लिए हम तैयारी कर सकते हैं. जैसे कृत्रिम रुप से ज़मीन की सतह ऊपर की जा सकती है. हम आवाज़ उठा सकते हैं ताकि दुनिया हमारी समस्या को जान सके.

और आप अतंरराष्ट्रीय बिरादरी से किस तरह मदद की माँग रहे हैं?

हमें तकनीक उपलब्ध कराने की बात कर रहे हैं और आर्थिक मदद भी माँगी है.

अगर आप कोपेनहेगन सम्मेलन में भाग लेते तो दुनिया को क्या संदेश देते?

मेरा संदेश यह होगा कि ये केवल जलवायु परिवर्तन का मामला नहीं है. ये सुरक्षा का भी मामला है और हमारा मानना है कि मानवाधिकार का भी, क्योंकि हमें भी जीने का अधिकार है. मालदीव में स्थिति बेहतर करने और मौसम में परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए लोकतंत्र को मज़बूत करना और अच्छी शासन को सुनिश्चित करना लाज़मी है.

आपने हाल ही में भारत के साथ रक्षा के क्षेत्र में समझौता किया है. आपको भारत से क्या मिल रहा है और आप बदले में क्या देंगे.

कोई रक्षा समझौता नहीं हुआ है. भारत से रडार सिस्टम मांगा था ताकि हम अपनी सीमाओं की निगरानी कर सकें और भारत ने हमें ये दिए हैं.

लेकिन ये भी ख़बर है कि बदले में भारत को फ़ौजी ठिकाना बनाने देंगे?

ऐसी कोई बात नहीं है. ये कहना बेबुनियाद है.

आपकी सरकार इस बात पर भी ग़ौर कर रही थी कि किसी दूसरे देश में ज़मीन ख़रीद ली जाए ताकि समुद्र की सतह में चिंताजनक इज़ाफ़ा होता है तो कहीं और बसा जा सके. क्या यह योजना आगे बढ़ी है?

देखिए, सीधी सी बात यह है कि हमें सूखी धरती की आवश्यकता है, अगर यहाँ समुद्र की सतह में वृद्धि होती है तो कहीं न कहीं ज़मीन की ज़रूरत पड़ेगी. लेकिन इसकी फ़िलहाल कोई आवश्यकता नहीं है. अगर इसकी ज़रूरत आती है तो हमें आर्थिक रुप से तैयार रहना चाहिए.

तो आपने किस देश की पहचान की है?

हमारी ये माँग है कि अगर मादलीव ज़मीन ख़रीदना चाहे तो उन्हें कर में छूट दी जाएं. क्योंकि हम ऐसी क़ौम हैं जिसे अपनी ज़मीन के खोने का ख़तरा है. हम कोई एक जगह ऐसी ज़मीन ख़रीदने के लिए नहीं सोच रहे हैं, लेकिन अगर ऐसी कोई स्थिति आती है तो भारत और श्रीलंका से छूट मिलनी चाहिए.

तो क्या आप भारत या श्रीलंका को प्रमुखता देंगे?

सच है कि भारत और श्रीलंका हमारे लिए मुनासिब जगह होंगी लेकिन इस बारे में कोई अंतिम फ़ैसला नहीं किया गया है.

और अंत में ये बताएं कि मालदीप में राजनीति की स्थिति क्या है?

आर्थिक मंदी से पर्यटन पर असर पड़ा है. लेकिन स्थिति ठीक है और आशा है कि साल के अंत तक स्थिति सामान्य हो जाएंगी. पिछले साल सात लाख पर्यटक आए थे और इस साल भी उस संख्या को पहुँच जाएंगे. लेकिन हम जलवायु को सामान्य रखने के लिए पर्यटक की संख्या को 10 लाख ही रखना चाहेंगे.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.