'पाकिस्तान को तीन अरब डॉलर दिए'

Image caption अमरीकी राजदूत ने सार्वजनिक किया कि ज़रदारी के कार्यकाल में तीन अरब डॉलर दिए गए

अमरीका ने कहा है कि राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के चुनाव के बाद से पाकिस्तान को सुरक्षा, विकास और आर्थिक मदद के तौर पर तीन अरब डॉलर दिए गए हैं.

पाकिस्तान में अमरीका की राजदूत एन पैटरसन ने एक बयान में कहा है, "अमरीकी सरकार पाकिस्तान को दीर्घकालिक समझौतों और अमरीकी क़ानून के तहत मदद देना जारी रखेगी. अमरीका की सरकार भरोसे के अभाव के कारण पाकिस्तान की सरकार को किसी तरह की आर्थिक मदद से वंचित नहीं रख रही है."

उधर इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता वुसतुल्ला ख़ान का कहना है, "लगता है कि अमरीका की ये घोषणा राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के बार-बार अमरीकी मदद में वृद्धि के अनुरोध के बाद की गई है. जहाँ शायद ज़रदारी चाहते हैं कि फ़्रेंड्स ऑफ़ पाकिस्तान पर पाकिस्तान को और मदद देने के लिए दबाव डाला जाए, वहीं अमरीका ने इसे न्यूट्रेलाइज़ करने के लिए सार्वजनिक किया है कि ज़रदारी साहब के कार्यकाल के दौरान तीन अरब डॉलर दिए जा चुके हैं.

लेकिन जब अमरीका पाकिस्तान को मदद देता है तो क्या वह पाकिस्तान की सरकार के ज़रिए ही दी जाती है?

ख़र्च के बारे में जानकार

बीबीसी संवाददाता वुसतुल्ला ख़ान कहते हैं, "रक्षा और सामाजिक क्षेत्र के लिए मिलने वाली मदद अलग-अलग होती है. इसे देने के रास्ते इस प्रकार हैं - एक तो सीधा सरकार को पैसा जाता है, दूसरा पाकिस्तान में सक्रिय अमरीकी ग़ैरसरकारी संस्थाओं को पैसा जाता है या फिर अमरीका के भरोसे वाली ग़ैर-सरकारी संस्थाओं को पैसा भेजा जाता है."

उनका कहना है कि आजकल ग़ैरसरकारी संस्थाओं के मुक़ाबले में सरकार के हाथ में बहुत कम आर्थिक मदद आती है. पहले सरकार को ग़ैरसरकारी संस्थाओं के मुक़ाबले में ज़्यादा आर्थिक मदद मिलती थी.

पाकिस्तान को मिलने वाली इस आर्थिक मदद के इस्तेमाल के बारे में क्या जानकारी सार्वजनिक होती है?

वुसतुल्ला ख़ान कहते हैं, "दावे तो बहुत होते हैं, जब पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बड़ा भूकंप आया था तब राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने भी कहा था कि एक-एक पाई जो भी आएगी उसका ख़र्च आप वेबसाइट पर देख पाएँगे लेकिन मैं तो ये जानकारी हासिल नहीं कर पाया. सिद्धांत तौर पर तो सरकार मानती है कि जानकारी दी जानी चाहिए लेकिन फ़्रीडम ऑफ़ इनफ़ोर्मेशन एक्ट अब भी संसद के सामने पड़ा हुआ है और फ़िलहाल उसके ज़रिए जानकारी नहीं ली जा सकती."

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