पाक को ब्रिटेन से भी मदद

पाकिस्तानी सैनिक
Image caption ब्रिटेन पाकिस्तान को इस प्राधिकरण की स्थापना के लिए पैसा और प्रशिक्षण देगा

बीबीसी ने पाया है कि पाकिस्तान अब अपने यहां राष्ट्रीय स्तर पर एक सुरक्षा एजेंसी खड़ी करने की तैयारी में लगा है और इस काम में उसकी मदद ब्रिटेन कर रहा है.

क़रीब 200 अधिकारियों वाली इस संस्था का काम होगा पाकिस्तान में चरमपंथ की गतिविधियों को रोकने और उनसे निपटने की दिशा में काम करना.

ब्रिटेन और पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक यह एजेंसी चरमपंथ से लड़ने के साथ ही राजनीतिक स्थायित्व को बढ़ाने में भी मदद करेगा.

यह एजेंसी ब्रितानी एजेंसी एमआई-5 और गृह विभाग की तर्ज पर काम करेगा.

वैसे चरमपंथ को पनपने से रोकने के लिए आर्थिक विकास को बल देने वाला एक अमरीकी विधेयक भी पाकिस्तान के लिए अगले पाँच वर्षों तक राहत की एक बड़ी राशि मुहैया कराने का रास्ता खोल रहा है.

इसके तहत असैन्य कार्यक्रमों के ज़रिए चरमपंथ से निपटने की कोशिश के लिए पाकिस्तान को अमरीकी सरकार आर्थिक मदद देगी.

पूरे परिप्रेक्ष्य में कई जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की तालिबान के साथ लड़ाई अफ़गानिस्तान की लड़ाई सा चेहरा ले सकती है.

चिंता

दरअसल, ब्रितानी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ब्रिटेन पर चरमपंथी हमलों में से तीन चौथाई का स्रोत पकिस्तान में होता है.

बीबीसी के रिचर्ड वॉटसन के अनुसार ब्रिटेन पाकिस्तान को इस नई सुरक्षा एजेंसी की स्थापना के लिए पैसा और प्रशिक्षण देगा.

शुरुआत में ब्रिटेन के चरमपंथ और धार्मिक मामलों के करीब 200 विशेषज्ञ पकिस्तान भेजे जाएंगें.

तय कार्यक्रम के मुताबिक छह माह के भीतर चरमपंथ से लड़ने की एक नीति तैयार कर ली जाएगी और एक शोध कार्यक्रम भी शुरू कर दिया जाएगा. इस शोध का एक उद्देश्य धार्मिक शिक्षा के केंद्रों और बढ़ती कट्टरता का अध्ययन करना भी होगा.

इस योजना के आलोचक कहते हैं कि पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी आईएसआई इस कार्यक्रम को बाधित कर सकती है क्योंकि इस प्राधिकरण के आने के बाद भी वही चरमपंथी मामलों की जाँच करेगी.

हालांकि बीबीसी संवाददाता को पाकिस्तानी सूत्र ने बताया कि आईएसआई को इस कार्यक्रम के लिए विश्वास में लिया गया है.

ब्रितानी गृह मंत्रालय ने पैसा देने की बात पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है पर उन्होंने इस तरह के किसी भी कदम का ज़ोरदार समर्थन किया है.

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