स्वात में लौटा सिनेमा और संगीत

पाकिस्तान की उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत का स्वात क्षेत्र एक लंबे समय से हिंसा-बमबारी-चरमपंथ के लिए सुर्खियों में रहा है.लेकिन स्वात के एक नागरिक का कहना है कि संगीनों के साए में रहने वाले स्वात में अब संगीत के सुर भी सुनाई देने लगे हैं.

मुनीर (बदला हुआ नाम) स्वात घाटी में एक प्रशासक हैं. इस साल की शुरुआत में जब घाटी में तालेबान और सेना के बीच जंग शुरू हुई तो उन्होंने अपनी शादी स्थगित कर दी थी. अब वे शादी करने जा रहे हैं.मुनीर बता रहे हैं कि उन्होंने अपनी शादी के लिए क्या-क्या तैयारी की है और घाटी में सिनेमा-संगीत की वापसी कैसे हुई.

"इन दिनों हम अपने घर को शादी के लिए सज़ा रहे हैं जो कि नौ या 10 अक्तूबर को हो सकती है. मेरे घर वाले और रिश्तेदार बहुत सी चीजें ख़रीद रहे हैं, जैसे नए कपड़े, जूते और रिसेप्शन के लिए खाने-पीने का सामान.

यह एक छोटी शादी होगी. मेरे दोस्त और अपने सहपाठी की मौत से हम बेहद आहत है. इसलिए हम बड़ी और शोर-शराबे वाली शादी नहीं चाहते हैं.

शादी के लिए पहले 25 जून की तारीख़ तय की गई थी लेकिन स्वात घाटी की भयावह स्थिति और परिवार के विस्थापित हो जाने के कारण उसे स्थगित कर देना पड़ा.

कई अन्य शादियाँ भी स्थगित कर दी गईं थीं. हाल के हफ्तों में हमने कुछ शादियाँ होती देखी हैं. पिछले चार दिनों में मैं अपने गाँव में हुई पाँच शादियों के बारे में जानता हूँ.

सिनेमा हॉल

मिंगोरा (स्वात का मुख्य शहर) में दो सिनेमा हाल हैं, एक शहर के बीचोबीच और एक बाहरी इलाक़े में. उन्हें तालेबान ने बंद करा दिया था. उनमें से एक शहर से बाहर स्थित स्वात सिनेमा अब फिर से खुल गया है.

मैं सिनेमा देखने नहीं जाता हूँ लेकिन बहुत से लोग जाते हैं. इनमें जब कोई फ़िल्म चल रही होती है तो उसके बाहर मैंने सैकड़ों लोगों को देखा है. उनमें से अधिकतर युवा लड़के होते हैं.

मैं वहाँ किसी डर की वज़ह से नहीं बल्कि इसलिए नहीं जाता हूँ कि मुझे यह पसंद नहीं है. मैने अपने जीवन में केवल दो बार सिनेमा देखा है, वह भी तब जब मैं छात्र था. छोटे पर्दे की तुलना में बड़े पर्दे पर फ़िल्मों में काफ़ी अंतर होता है. वो क़ाफ़ी विलक्षण होती हैं.

मैं घर पर फ़िल्में देखना अधिक पसंद करता हूँ. डीवीडी और सीडी देखने के लिए मेरे पास सभी उपकरण हैं. मैंने एक कंप्यूटर भी ले लिया है जिससे कि अगर मैं चाहूँ तो इंटरनेट से फ़िल्में डाउनलोड कर सकूँ लेकिन मेरी फ़िल्मों में बहुत अधिक दिलचस्पी नहीं है. मैं क्रिकेट और फ़ुटबॉल अधिक पसंद करता हूँ.

हम अभी भी हँसते हैं और यह नहीं समझ पाएँ हैं कि तालेबान ने सिनेमाहॉलों को नष्ट क्यों नहीं किया. उन्होंने स्कूल और कॉलेजों को निशाना बनाया और लड़कियों के स्कूल जाने पर प्रतिबंध लगा दिया. उन्होंने यह सब शरीया के नाम पर किया लेकिन उन्होंने सिनेमा जैसी अपसंस्कृति की जगहों को नहीं छुआ. मुझे लगता है कि उन्हें सिनेमाहॉलों को पहले उड़ा देना चाहिए था.

अच्छी बात यह है कि अब और डर नहीं है. संगीत और फ़िल्म को मिंगोरा के हर चौराहे पर आसानी से ख़रीदा जा सकता है. वास्तव में यह एक बहुत बड़ा अंतर है. अब आप सड़कों पर संगीत सुन सकते हैं और कई लोग तो कारों में भी संगीत सुनते हैं. हाल ही में मैंने भी संगीत के कुछ कैसेट्स ख़रीदे हैं.

इसलिए आज ज़िंदगी और सामान्य हो गई है. लोगों में अब डर नहीं है और चीजें सामान्य हो रही हैं.

समस्या

इस समय लोग केवल एक ही समस्या का सामना कर रहे हैं. मुझे लगता है कि चेकपोस्ट पर बेवज़ह की परेशानी हमारी सबसे बड़ी समस्या है. यहाँ बहुत से चेकपोस्ट हैं वे आप को आधे घंटे तक रोककर रख सकते हैं.

मेरी बहन और भांजा पेशावर जाना चाहते हैं और अगले दिन उन्हें तीन घंटे इंतज़ार करना पड़ता है.

यहाँ एक पुल हैं जो ऊपरी और निचले स्वात को आपस में जोड़ता है. मैं इसे तभी पार करता हूँ जब मिंगोरा जाता हूँ. इस पुल को 2008 के अंत में तोड़ दिया गया था. सेना ने इसे दुबारा बनाया लेकिन यह काफ़ी संकरा है.

अगर आप कार से हैं तो आपको रोज़ाना कम से कम तीन घंटे इंतज़ार करना पड़ सकता है. मिंगोरा के बाज़ार की ओर जा रहे लोगों के लिए यह एक बड़ी समस्या है.

बहुत से लोगों ने मोटरसाइकिल ख़रीद ली है इसलिए वे लाइन में नहीं फंसते हैं.मैं रोज़ मिंगोरा जाता हूँ, कई बार मुझे वहाँ पैदल जाना पड़ता हैं. वहाँ की एक तरफ की दूरी क़रीब चार किमी है.

यह जानबूझकर किया गया है. सेना ट्रैफ़िक पर नियंत्रण करना चाहती है. अगर वे करना चाहें तो पुल को और चौड़ा बनवाकर इस समस्या का समाधान भी कर सकते हैं.

इन सबके बाद भी लोग सेना से ख़ुश हैं. हमने और चरमपंथियों को नहीं देखा है और जीवन भी सुधरा है. एक कॉलेज के प्रवक्ता ने मुझे एक दिन बताया कि उनके गाँव का एक चरमपंथी गिरफ़्तार कर लिया गया है. दो दिन बाद उसका शव सड़क के किनारे मिला.

लोग बहुत ख़ुश हैं. सेना जिस तरह से चरमपंथियों से निपट रही है, लोग उसकी सराहना कर रहे हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि उन्होंने घाटी में जैसा किया वैसा दुनिया के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ."

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