'सैन्य अधिकारी मुआवज़ा दे'

दुल्हन (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption मेजर पंत ने शादी से इनकार किया था

दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय सेना के एक अधिकारी मेजर चंद्रशेखर पंत को आदेश दिया है कि वो उस अफ़ग़ान महिला को हर महीने पैसे दे जिसने उन पर बेवफ़ाई का आरोप लगाया है.

अफ़ग़ानिस्तान से भारत पहुँची साबरा अहमदज़ई ने अपनी याचिका में कहा है कि मेजर पंत ने अफ़ग़ानिस्तान में तैनाती के दौरान उनसे शादी की लेकिन बाद में भारत आकर उन्हें भुला दिया.

अहमदज़ई ने कहा है कि शादीशुदा होने के बावजूद मेजर पंत ने उन्हें गुमराह किया.

कोर्ट ने कहा है कि मेजर चंद्रशेखर पंत के ख़िलाफ़ साबरा अहमदज़ई का द्विविवाह का आरोप सही है.

अदालत ने निर्देश दिया है कि मेजर पंत साबरा को हर महीने आठ हज़ार रुपए महीने दें.

मेजर चंद्रशेखर पंत ने इस बात से इनकार किया था कि उसने साबरा से शादी की है और कहा था कि शादी का वीडियो फ़र्ज़ी है.

साबरा का आरोप है कि मेजर पंत ने शादी के बाद बताया कि वो पहले से शादीशुदा हैं और दो बच्चे भी हैं.

हालांकि ये अदालत का अंतरिम आदेश ही है. पूर्ण फ़ैसला आना अभी बाकी है.

शादी

कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की है कि साबरा का मेजर पंत के साथ रिश्ता शादी-शुदा संबंधों के जैसा है.

मेजर पंत के वकील ने बीबीसी के फ़ोन का जवाब नहीं दिया. रक्षा मंत्रालय ने भी कोई टिप्पणी नहीं की है और केवल इतना कहा है कि वो मामले की जाँच करेगा.

साबरा के वकील रविंद्र गरिया ने कहा है कि वो मामले को आगे तक लेकर जाएगी. उनका कहना था, "हम चाहेंगे कि कोर्ट ऐसा ही अंतिम आदेश भी जारी करे ताकि मानसिक पीड़ा के लिए उसे उचित मुआवज़ा मिल सके."

साबरा काबुल के अस्पताल में हिंदी अनुवादक का काम कर रही थी जब उनकी मुलाकात मेजर पंत से हुई.

अफ़ग़ान महिला का कहना है कि जब उनके परिवारवालों ने अपनी रज़ामंदी दे दी और मेजर पंत ने इस्लाम कबूल कर लिया, तब उन्होंने शादी करने का फ़ैसला किया.

साबरा ने बीबीसी को बताया, "हम दोनों 15 दिनों के लिए साथ थे और फिर मेजर का भारत तबादला कर दिया गया. उन्होंने वादा किया कि वे अपने माता-पिता के साथ वापस लौटेंगे. छह महीनों में उन्होंने मुझे केवल तीन बार फ़ोन किया. अपनी आख़िरी फ़ोनकॉल में उन्होंने मुझसे कहा- तुम जवान हो और दोबारा शादी कर सकती हो, मेरी शादी हो चुकी है और दो बच्चे भी हैं."

अफ़ग़ानिस्तान में आज भी विदेशियों से शादी करने को समाज में अच्छा नहीं समझा जाता.

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