पाक: सेना-सरकार के बीच मतभेद

कियानी और ज़रदारी
Image caption केरी लुगर बिल पर सेनाध्यक्ष कियानी और राष्ट्रपति ज़रदारी के बीच मतभेद हैं.

पाकिस्तान को असैनिक कार्यों के लिए मिलने वाली अमरीकी सहायता पर पाकिस्तान सरकार और सेना के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं. अमरीका ये सहायता केरी-लुगर बिल के तहत ही दे सकता है और पाकिस्तान में इसी पर बवाल मच गया है.

अमरीका के केरी-लुगर बिल के तहत अमरीकी विदेश मंत्री को पुष्टि करनी होगी कि पाकिस्तान परमाणु अप्रसार में सहयोग कर रहा है.

उन्हें ये भी पुष्टि करनी होगी कि पाकिस्तान 'आतंकवाद का सामना करने के बारे में प्रतिबद्ध है.' इस प्रतिबद्धता में 'पाकिस्तानी सेना और ख़ुफ़िया एजेंसियों का चरमपंथी संगठनों को समर्थन ख़त्म करना' भी शामिल किया गया है.

पाकिस्तान की संसद में इस बिल पर हंगामा हो चुका है और विपक्ष ने सरकार की कड़ी आलोचना की है.

सेना को कड़ी आपत्ति

पाकिस्तानी सेना ने अमरिका की ओर से मिलने वाली सहायता पर आपत्ति जताई है.

सेनाध्यक्ष जनरल अशफाक़ परवेज़ कियानी की अध्यक्षता में वरिष्ठ सैनिक कमांडरों की बैठक में कहा गया कि इस मामले को संसद में लाया जाए.

बैठक के बाद जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार सेना इस बिल पर अपनी आपत्तियों से औपचारिक रुप से सरकार को अवगत कराएगी.

सेनाध्यक्ष कियानी ने बैठक में कहा कि 'राष्ट्रीय सुरक्षा पर इस बिल के प्रभाव पड़ेंगे और संसद इस बिल पर फिर से विचार करे.'

केरी-लुगर बिल पर सेना की ओर से आने वाली आपत्ति पर सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री क़मर ज़मान क़ायरा ने इस्लामाबाद में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों को बताया, "सेना प्रमुख को अपनी राय रखने का अधिकार है और बिल पर आलोचना करने वाले इसे पहले पढ़ ज़रूर लें."

उन्होंने आगे कहा, "हम अमरीकी सहायता देश की प्रतिष्ठा का सौदा करके नहीं ला रहे हैं और सरकार जो भी काम कर रही है वो जनता के हित में है."

जॉन केरी और रिचर्ड लुगर ने मिलकर इस बिल को लिखा है. इस बिल का समर्थन करने वालों का कहना है कि इससे उन पाकिस्तानियों को भरोसा दिलाने में मदद मिलेगी जो अमरीका की मदद और उसके मकसदों को शक की निगाह से देखते हैं.

ग़ौरतलब है कि अमरीकी कांग्रेस ने पिछले सप्ताह इस बिल को पारित किया था जिसमें अमरीका पाकिस्तान को अगले पांच सालों में हर साल असैनिक मक़सदों के लिए डेढ़ अरब डॉलर की सहायता देगा.

राष्ट्रीय एसेंबली में चौधरी निसार अली ख़ान ने कहा, "केरी-लुगर बिल की हर धारा राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न है और बिल के ज़रिए अमरीका को हमारे परमाणु कार्यक्रम तक पहुँच दी जा रही है."

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने संसद में इस बिल का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने इस बिल पर राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष को विश्वास में लिया था.

उन्होंने कहा, "संसद और सेना को यदि इस बिल पर आपत्ति है तो सर्वसम्मति के लिए कोशिश की जाएगी."

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