तालेबान ने ली धमाके की ज़िम्मेदारी

मारे गए एक व्यक्ति की रिश्तेदार
Image caption जुलाई 2008 में भारतीय दूतावास के गेट पर हुए धमाके में अनेक लोग मारे गए थे

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में शहर के बीचों-बीच भारतीय दूतावास के पास एक कार बम धमाका हुआ है जिसमें मरने वालों की संख्या 17 हो गई है. धमाके में 60 से अधिक घायल हुए हैं.

तालेबान ने इस धमाके की ज़िम्मेदारी ली है. अपनी वेबसाइट पर जारी एक बयान में तालेबान ने कहा है कि आत्मघाती हमलावर ने यह धमाका किया और इसमें भारतीय दूतावास को निशाना बनाया गया था.

धमाके की आवाज़ काबुल के कई इलाक़ों में सुनाई दी. इस साल अगस्त से ये काबुल में चौथा बम धमाका है.

किसी भारतीय के मारे जाने की ख़बर नहीं है लेकिन कुछ भारतीय घायल हुए हैं. मृतकों में अधिकतर आम अफ़ग़ान नागरिक हैं.

अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई के कार्यालय ने इस घटना की निंदा की है.

'दूतावास था निशाना'

भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "हमारी जानकारी के अनुसार विस्फोटकों से लदी एक कार दूतावास की दीवार तक पहुँची और फिर उसमें धमाका किया गया. सभी भारतीय अधिकारी और कर्मचारी सुरक्षित हैं. भारत-तिब्बत सीमा दल के तीन कर्मचारियों को चोट लगी है."

उनका कहना था कि उनका अनुमान है कि भारतीय दूतावास को निशाना बनाकर ही ये धमाका किया गया था. उन्होंने ये भी कहा कि भारतीय दूतावास की एक दीवार को क्षति पहुँची है और इमारत में कई खिड़कियाँ-दरवाज़े टूट गए हैं.

निरुपमा राव के अनुसार, "ये धमाका उतना भी भयावह था जितना जुलाई 2008 का धमाका था. लेकिन उस धमाके के बाद भारत ने कई सुरक्षा कदम उठाए थे इसीलिए इस बार बड़ा हादसा टल गया."

'सफ़ाई कर्मचारी मारे गए'

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चारों ओर मलबा बिखरा हुआ है और उस इलाक़े के ऊपर धुंआ उठ रहा है.

एक प्रत्यक्षदर्शी हबीब जान ने बीबीसी को बताया, "एक करोला कार भारतीय दूतावास के सामने पार्क की गई थी. भीड़ का समय था और दफ़्तर पहुँचने के दस मिनट बाद मुझे धमाके की आवाज़ सुनी. सड़क पर बहुत सारे सफ़ाई कर्मचारी अपने काम में जुटे थे, उनमें से अधिकतर मारे गए"

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी का कहना था, "मैं काम कर रहा था जब धमाका हुआ. पास की इमारत की ख़िड़कियाँ टूट गईं और मैं अपने तंबू में भागा."

संबंधित समाचार