ईरान के कमांडरों की मौत

ईरान गार्ड्स
Image caption ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्डों का देश में ख़ासा दबदबा माना जाता है.

ईरान के दक्षिण पूर्व इलाक़े में एक आत्मघाती हमले में विशेष सैन्य दस्ते रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई कमांडरों और कबीलाई नेताओं समेत 31 लोग मारे गए हैं.

सरकारी मीडिया ने कहा है कि सिस्तान बलूचिस्तान प्रांत में हुए इस हमले में 31 लोग मारे गए हैं और दर्ज़नों की संख्या में लोग घायल हुए हैं.

ये कमांडर पिशीन प्रांत में कबीलाई नेताओं के साथ एक बैठक करने के लिए गए हुए थे.

ताज़ा जानकारी के अनुसार गार्ड्स के दो शीर्ष कमांडर भी मारे गए हैं. सरकारी मीडिया का कहना है कि एक से अधिक आत्मघाती हमलावरों ने कमांडरों और कबीलाई नेताओं की बैठक पर हमला किया.

ईरान का कहना है कि इलाक़े में सक्रिय सुन्नी विद्रोही गुट जुनदल्लाह ने हमलों की ज़िम्मेदारी ली है. ईरान ने इन हमलों के लिए अमरीका और ब्रिटेन को भी दोषी ठहराया है.

अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता इयान कैली ने इन हमलों में अमरीका के शामिल होने संबंधी आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि अमरीका इन आतंकवादी हमलों की निंदा करता है.

ईरानी संसद के स्पीकर ने हमलों की कड़ी निंदा की है.

सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मूलत: बलूच लोग रहते हैं जो सुन्नी मुस्लिम हैं और शिया शासन का विरोध करते हैं.

सरकारी संवाद समिति इरना के अनुसार रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ज़मीनी सेना के डिप्टी कमांडर जनरल नूर अली शूस्तारी, गार्ड्स के मुख्य प्रांतीय कमांडर रजब अली मोहम्मदज़ादेह भी इस हमले में मारे गए हैं.

ईरानी संसद के स्पीकर अली लारीजानी ने संसद के अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ हम शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.’’ उनका यह संबोधन सरकारी रेडियो पर लाइव प्रसारित किया गया.

उनका कहना था, ‘‘आतंकवादियों का मकसद सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा स्थिति को अस्त-व्यस्त करना था.’’

सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत की सीमाएं पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान से भी लगती हैं और यह पूर्व में भी इस प्रांत में तस्करी, ड्रग्स, डकैती और अपहरण जैसी समस्याएं रही हैं.

ईरान में सुन्नी विद्रोही गुट जुनदल्लाह का कहना है कि वो देश के सुन्नी अल्पसंख्यकों के राजनीतिक और धार्मिक शोषण के ख़िलाफ़ लड़ रही है.

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