'ज़्यादा वज़न वालों की रक्षा करो'

लंदन मे भारी वज़न वालों के साथ कथित भेदभाव के विरोधियों ने इस पर प्रतिबंध लगाने की माँग रखी है.

Image caption भारी वज़न वालों के ख़िलाफ़ भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठी है

उनका कहना है कि मोटे लोगों पर होने वाले हमलों को अपराध की उसी श्रेणी मे रखा जाए जिसमे रंगभेद, उम्र या धर्म के नाम पर होने वाले भेदभाव को रखा जाता है.

इस सिलसिले मे कार्यकर्ताओं ने लंदन के मेयर के दफ़्तर पर एक प्रदर्शन किया. उनकी मांग थी कि मेयर इस बात की पहल करें कि भारी वज़न वाले लोगों को नौकरी देने मे किसी तरह का पूर्वाग्रह ना अपनाया जाए.

प्रदर्शनकारी चाहते थे कि ब्रिटेन अमरीका के सैन फ्रांसिस्को का अनुसरण करे जंहा इस तरह का प्रतिबंध है. वहाँ डॉक्टरों को उनके मरीज़ों को ज़बरदस्ती वज़न कम करने की सलाह देने पर भी प्रतिबंध है.

सैन फ्रांसिस्को की एक वकील सोंड्रा सोलवे का कहना था कि वहाँ एक अधिनियम है जिसके तहत आप अपने मरीज़ से वज़न पर बात कर सकते हैं, पर अगर मरीज़ अपने वज़न को लेकर बात ना करना चाहे, तो आपको उनकी भावनाओं की क़द्र करनी होगी.

ब्रिटेन के "साइज़ एक्सैपटेंस मूवमेंट" के कार्यकर्ताओं का कहना है की एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ 93 प्रतिशत नियोक्ता यानि नौकरी देने वाले बराबर की क़ाबिलियत रखने वाले मोटे की तुलना मे पतले लोगों को नौकरी देना पसंद करते हैं.

भारी वज़न वालों के लिए काम करने वाली एक कार्यकर्ता कैथरीन का कहना था की ब्रिटेन में मोटे लोगों को घूरा जाता है, उन पर फब्तियां कसी जाती हैं और उन पर हमले भी होते हैं.

एक और कार्यकर्ता मार्शा कूपे का कहना था की उन्हे मोटा होने के कारण पीटा गया, उन पर बियर फेंकी गयी और ट्रेन मे उन पर हमला हुआ.

डॉक्टर इयान कैंपबैल जो भारी लोगों के लिए एक चैरिटी संस्था चलाते है, कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता की इस तरह के क़ानून का कोई त्वरित असर होगा. लेकिन वो मानते हैं कि भारी वज़न वाले लोगों को सामाजिक और व्यावसायिक जीवन मे काफ़ी पूर्वाग्रहों को झेलना पड़ता है और उनकी रक्षा के लिए कुछ किया जाना चाहिए.

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