अफ़ग़ानिस्तान नाज़ुक मोड़ पर: हिलेरी

Image caption शपथग्रहण के मौके पर हिलेरी क्लिंटन की मौजूदगी को करज़ई के लिए स्वीकृति की मुहर के तौर पर देखा जा रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई के शपथ ग्रहण के मौके पर काबुल पहुंचीं अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान एक 'नाज़ुक मोड़' पर है.

काबुल के अमरीकी दूतावास में क्लिंटन ने कहा कि राष्ट्रपति करज़ई के लिए ये एक मौका पेश कर रहा है अफ़ग़ान लोगों की ज़िंदगी बेहतर करने के लिए.

करज़ई एक ऐसे चुनाव के बाद राष्ट्रपति घोषित किए गए हैं जिसमें काफ़ी धांधली के आरोप थे.

उन पर पश्चिमी देशों की ओर से भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी ख़ासा दबाव है.

गुरुवार को होनेवाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए हिलेरी क्लिंटन भारी सुरक्षा के बीच काबुल पहुंची हैं.

पश्चिमी देशों के अधिकारियों को उम्मीद है कि करज़ई अपने उदघाटन भाषण में अफ़ग़ानिस्तान में सुधार के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताएंगे.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा, "हम अफ़ग़ानिस्तान की सरकार और अफ़ग़ानिस्तान की जनता दोनों ही के साथ मज़बूत साझेदारी चाहते हैं और मैं हमेशा यही कहती हूं कि साझेदारी दोनों के साथ होगी—किसी एक के साथ नहीं."

हिलेरी क्लिंटन के साथ यात्रा कर रहीं बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि शपथग्रहण के मौके पर हिलेरी की मौजूदगी एक तरह से राष्ट्रपति करज़ई के नेतृत्व पर स्वीकृति की मुहर है.

वहीं काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशेंस का आकलन है कि पश्चिमी नेता हामिद करज़ई का इसलिए साथ दे रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं है.

Image caption अफ़गानिस्तान में मरने वाले विदेशी सैनिकों की संख्या बढ़ रही है.

उनका कहना है कि अगर वो साथ नहीं देते हैं तो स्थिति और बदतर हो जाएगी.

लेकिन दूसरी सच्चाई ये भी है कि अफ़गानिस्तान में मरने वाले पश्चिमी देशों के सैनिकों की बढ़ती संख्या के साथ पश्चिमी नेताओं का रूख कड़ा हो रहा है.

वो चाहते हैं कि करज़ई भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाएं.

और इन सबके बीच राष्ट्रपति ओबामा को फ़ैसला करना है कि अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिक भेजें या नहीं.

उनके प्रशासन पर ये सोच हावी हो रही है कि ज़्यादा सैनिकों के भेजने का भी कोई असर तब तक नहीं होगा जब तक अफ़गानिस्तान सरकार अपने शासन का दायरा पूरे देश में नहीं फैलाती.

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