श्रीलंका के शरणार्थी 'मुक्त होंगे'

श्रीलंका में विस्थापितों का शिविर
Image caption श्रीलंका में विस्थापितों के शिविर में स्वास्थ्य और भोजन की व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं

श्रीलंका सरकार ने कहा है कि तमिल विद्रोहियों के साथ संघर्ष शुरु होने के बाद से शिविरों में रह रहे तमिल विस्थापित अगले महीने यानी दिसंबर से कहीं भी आने जाने के लिए स्वतंत्र होंगे.

25 वर्षों के गृहयुद्ध के बाद श्रीलंका सरकार ने पिछले मई में तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई के साथ निर्णायक संघर्ष किया था.

इसके बाद एलटीटीई के ख़त्म हो जाने की घोषणा कर दी गई है.

राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के विशेष सलाहकार ने इसकी पुष्टि की है कि सभी सरकारी शिविर बंद कर दिए जाएँगे.

इन शिविरों में अभी भी एक लाख 30 हज़ार लोग रह रहे हैं.

उनका कहना है कि शिविरों में रह रहे सभी लोगों का जनवरी तक पुनर्वास कर दिया जाएगा.

राष्ट्रपति के विशेष सलाहकार बासिल राजपक्षे, जो राष्ट्रपति के भाई भी हैं, ने एक बड़े शरणार्थी शिविर के दौरे के बीच यह घोषणा की है.

अब तक शिविरों में रह रहे लोगों को वहाँ रोके रखा गया था. सरकार का कहना था कि वह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन लोगों में एलटीटीई के लोग न हों और दूसरा इस बीच सरकार देश के उत्तरी हिस्से में उन इलाक़ों से बारुदी सुरंग आदि हटाना चाहती थी जहाँ एलटीटीई का गढ़ था.

इन शिविरों को सेना ने कंटीले तारों से घेर रखा था.

बहुत से लोगों ने शिविरों में साफ़ सफ़ाई की ख़राब व्यवस्था और भोजन की ठीक व्यवस्था न होने की शिकायतें की थीं.

श्रीलंका सरकार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दबाव था कि वह शिविरों से लोगों को घर लौटने की अनुमति दे.

सरकार ने पहले कहा था कि वह इस साल के अंत तक 80 प्रतिशत शरणार्थियों को लौटने की अनुमति दे देगी लेकिन अब कुछ हफ़्ते पहले ही ऐसा करने की घोषणा कर दी गई है.

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