विस्थापितों को घूमने की आज़ादी

श्रीलंका के  शिविर में बच्चे
Image caption इन शिविरों में हज़ारो तमिल हैं जो युद्ध से विस्थापित हुए थे

श्रीलंका की सरकार ने कहा है कि उसने उन शिविरों को खोल दिया है जहाँ तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई की हार के बाद से लगभग एक लाख 30 हज़ार लोगों को रखा गया था.

इस फ़ैसले के बाद पहली बार इन तमिल लोगों को बाहर जाने और घूमने-फिरने की आज़ादी होगी.

मेजर जनरल कमल गनारत्ने जिनके नियंत्रण में मेनिक फ़ार्म नाम का कैंप है, कहते हैं कि कैंप से जाने से पहले इन लोगों को फ़ॉर्म भरना होगा ताकि इनके आने-जाने की निगरानी की जा सके.

उनका कहना था कि मंगलवार से जो लोग शिविर छोड़कर जाएँगे, उन्हें वापस ज़रूर आना होगा और यदि कोई स्थायी तौर पर शिविर छोड़ने की कोशिश करता है तो उसका पीछा किया जाएगा.

अंतरराष्ट्रीय आलोचना

श्रीलंका सरकार ने दस दिन पहले घोषणा की थी कि इन शिविरों को खोल दिया जाएगा.

कोलंबो में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इन कैंपों में रहने वालों पर पाबंदियों के वजह से और इनका नियंत्रण सेना के पास होने की वजह से श्रीलंका को देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख़ासी आलोचना झेलनी पड़ रही थी.

सरकार का कहना है कि कि अगले साल जनवरी के अंत तक इन शिविरों को बंद कर दिया जाएगा.

मानवाधिकार संगठनों के अनेक कार्यकर्ता इन शिविरों को 'खुली जेल' मानते हैं क्योंकि जो कुछ भी हो रहा है वह इन नागरिकों की अनुमति या उनकी राय पूछकर नहीं हो रहा है.

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