बीबीसी विशेष: पाकिस्तान की 26/11 चार्जशीट

चार्जशीट
Image caption चार्जशीट में कई अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं

पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधक अदालत ने मुंबई हमलों के अभियुक्त ज़की उर रहमान लखवी और छह अन्य के विरुद्ध भारत और पाकिस्तान में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त करने का आरोप दर्ज किया है.

पाकिस्तान में रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधक अदालत में मुंबई हमलों के कथित तौर पर मुख्य षड्यंत्रकारी ज़की उर रहमान लखवी और छह अन्य के ख़िलाफ़ चार्जशीट 25 नवंबर को दायर की है.

पाकिस्तान की 26/11 चार्जशीट

बीबीसी के पास उपलब्ध चार्जशीट की एक प्रति के मुताबिक मुंबई हमलों की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार का नुकसान हुआ. पाकिस्तान में जज मलिक मोहम्मद अकरम अवान की अदालत में सात अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मीडिया और आम जनता की नज़र से दूर मामला चल रहा है.

दस पन्ने के इस दस्तावेज़ में ये मामला सरकार बनाम हम्माद अमीन सादिक़ इत्यादि के नाम से दर्ज है. इस दस्तावेज़ के अनुसार, "…ऊपर बताई गई इन आतंकवादी गतिविधियों से आप ने दो पड़ोसी देशों – पाकिस्तान और भारत के बीच व्यापार को अस्त-व्यस्त किया और दोनों देशों के नागरिकों के सामान्य जनजीवन को भी अस्त-व्यस्त किया..."

'कमान लखवी के हाथ में'

हम्माद अमीन सादिक़, लखवी, मज़हर इक़बाल, अब्दुल वाजिद यानी जर्रार शाह, शाहिद जमील रियाज़ को प्रतिबंधित और अब भंग किए जा चुके संगठन लश्करे तैबा के सक्रिय सदस्य बताया गया है. इन पर आरोप है कि इन्होंने सिंध में यूसफ़ गोथ, कराची, मीरपुर साकरू में मुंबई के हमलावरों को प्रशिक्षण देने के लिए शिविर लगाए जिनकी कमान लखवी के हाथ में थी.

जमील अहमद और मोहम्मद यूनस अंजुम को सह-अभियुक्त नंबर छह और सात बताया गया है और इन पर (लापता सह-अभियुक्त मोहम्मद उसमान ज़िया, मुख़तार अहमद, मोहम्मद अब्बास नासिर, जावेद इक़बाल और गुफ़यान ज़फ़र के साथ) आरोप है कि इन्होंने लगभग 39 लाख रुपए शाहिद जमील रियाज़ और हम्माद अमीन सादिक़ को कराची के दो बैंक खातों में भेजे.

इस दस्तावेज़ के मुताबिक मुंबई हमलों से पहले ये पैसा गुजरांवाला और मुज़फ़्फ़राबाद के तीन अलग-अलग बैंक ख़ातों से आया था ‘ताकि 26-28 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों की सफलतापूर्वक तैयारी की जा सके.’

चार्जशीट के अनुसार, "…तुम अभियुक्त नंबर छह, जमील अहमद ने थुराया सैटेलाइट फ़ोन कंपनी से सिम कार्ड नंबर 881-655526412 अपने नाम में जेद्दाह, सऊदी अरब से लिया और इस सिम कार्ड को अपने आतंकवादी सह-अभियुक्त मोहम्मद अजमल कसाब और मुंबई आतंकवादी हमलों में मारे गए नौ अन्य को दिया."

जो षड्यंत्र था, उसका ज़िक्र करते हुए दस्तावेज़ में कहा गया है इन सात अभियुक्तों को 20 अन्य वांछित सह-अभियुक्तों की सक्रिय मदद से प्रशिक्षण, निर्देश, पैसा, छिपने की जगहें, कराची में किराए के मकान उपलब्ध कराए गए और फिर दस लोगों को मुंबई पर हमले करने के लिए छोड़ दिया गया.

दायर आरोप पत्र के अनुसार अभियुक्तों ने दस हमलावरों को सभी हथियार, विस्फोटक बम, ग्रेनेड भी उपलब्ध कराए ताकि 11 निर्दोष लोगों का कत्ल किया जा सके. दिलचस्प है कि जिनका क़त्ल हुआ उस सूची की शुरुआत तुकाराम गोपाल उम्बले से होती है जिन्होंने अजमल कसाब को पकड़ने में अपनी जान गँवाई थी.

इस दस्तावेज़ के मुताबिक - "अभियुक्त मज़हर इक़बाल और अब्दुल वाजिद यानी जर्रार शाह कसाब और नौ अन्य आतंकवादियों से वीओआईपी (वॉयस ऑवर इंटरनेट प्रोटोकोल), सैटेलाइट फ़ोन और मोबाइल फ़ोन के ज़रिए संपर्क में रहे और इन्हें घातक आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए निर्देश और आदेश देते रहे."

आरोप पत्र के अनुसार इन हमलों के मक़सद में जानबूझकर राजनीतिक नेताओं, विदेशियों, भारत की जानी-मानी हस्तियों इत्यादि का अधिक से अधिक क़त्ल (क़त्ल-ए-आम) शामिल था.

इसमें ये भी कहा गया है कि सात अभियुक्तों ने बीस सह-अभियुक्तों के साथ ‘शरारतपूर्ण तरीके से आग और विस्फोटकों के इस्तेमाल से’ न केवल 166 लोगों को मारा बल्कि 304 को घायल भी किया और मुंबई स्थित ताज महल होटल को तबाह किया.

चार्जशीट के मुताबिक, "…..इस तरह आप सभी ने पाकिस्तान अपराध संहिता की अनुच्छेद 436/109 के तहत अपराध किए हैं जो इस अदालत के दायरे में आते हैं. इसलिए मैं आदेश देता हूँ कि ये अदालत आपके ख़िलाफ़ - अभियुक्त नंबर एक से सात को – इन आरोपों के सिलसिले में अदालती कार्रवाई करे."

अनुच्छेद 109 किसी को अपराध करने के लिए उकसाने से संबंधित है, वहीं अनुच्छेद 436 आग या किसी विस्फोटक से शरारती हरकत करने से संबंधित है. पहले पाँच अभियुक्तों के ख़िलाफ़ पाकिस्तान आतंकवाद निरोधक क़ानून (1997) और उसके अनुच्छेद सात के अंतर्गत भी मामला दर्ज है जिसके लिए आतंकवादी गतिविधियों के लिए मौत की सज़ा का प्रावधान है.

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