राष्ट्रपति करज़ई को करारा झटका

हामिद करज़ई
Image caption मंत्रिमंडल पर संसद की मुहर ज़रुरी है

अफ़ग़ानिस्तान की संसद ने राष्ट्रपति हामिद करज़ई के प्रस्तावित मंत्रिमंडल के 24 में से 17 सदस्यों को नकार दिया है.

जिन लोगों को संसद ने नकार दिया है, उनमें पुराने क़बायली लड़ाके और ऊर्जा मंत्री इस्माइल ख़ान शामिल हैं. लेकिन रक्षा मंत्री अब्दुल रहीम वारदाक को फिर से नियुक्त करने को मंज़ूरी मिल गई है.

इसके अलावा जिन लोगों के नाम संसद ने ख़ारिज कर दिए हैं, उनमें न्याय, स्वास्थ्य, वित्त और महिला मामलों की मंत्री शामिल हैं.

पिछले दिनों हुए राष्ट्रपति के विवादास्पद चुनाव में हामिद करज़ई को विजय मिली थी और वो लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति बने हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मंत्रियों को नकारने से यह साबित होता है कि राष्ट्रपति करज़ई के सामने चुनौती कितनी बड़ी है.

संसद की ताक़त

अफ़ग़ानिस्तान के संविधान के अनुसार राष्ट्रपति को अपने मंत्रिमंडल के नाम संसद को भेजने होते हैं और वही लोग मंत्री बनाए जा सकते हैं जिनके नाम को संसद की मंज़ूरी मिल जाए.

इसके लिए संसद सदस्य गुप्त मतदान करते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन कुछ चुनिंदा अवसरों में से एक होता है जब सांसद कार्यपालिका को जवाबदेह बनाने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं.

शनिवार को संसद के दो सौ से अधिक सदस्यों ने इसके लिए मतदान किया.

संसद के स्पीकर मोहम्मद युनूस क़ानूनी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "जिन 24 लोगों के नाम राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने दिए थे, उनमें से सिर्फ़ सात ही विश्वासमत जीतने में सफल हुए हैं."

जिन लोगों के नामों को स्वीकृति दी गई, उनमें रक्षा मंत्री अब्दुल रहीम वारदाक के अलावा आंतरिक सुरक्षा मामलों के मंत्री हनीफ़ अटमार भी शामिल हैं.

जबकि जिन लोगों के नाम ख़ारिज किए गए उनमें ऊर्जा मंत्री इस्माइल ख़ान का नाम प्रमुख है. वे सोवियत संघ के ज़माने के क़बायली लड़ाके हैं और तालेबान विरोधी कमांडर रहे हैं. वे पिछले मंत्रिमंडल में ऊर्जा मंत्रालय का काम संभाल रहे थे.

उन पर मानवाधिकार हनन और भ्रष्टाचार दोनों के आरोप थे.

गृहयुद्ध के दिनों में क़बायली लड़ाके के रुप में अपनी भूमिका की वजह से भी वो बदनाम रहे हैं.

राष्ट्रपति करज़ई ने अपने मंत्रिमंडल में महिला मामलों के मंत्री के रुप में एकमात्र महिला का नाम दिया था. लेकिन हुस्न बानो ग़ज़ऩफ़ार का नाम भी संसद ने ख़ारिज कर दिया है.

हामिद करज़ई ने जिन मंत्रियों के नाम दिए थे उनमें विदेश मंत्री का नाम नहीं था. जानकार लोगों का कहना है कि इस महीने के अंत में अफ़ग़ानिस्तान पर लंदन में होने वाले सम्मेलन के पहले इस पद पर किसी के नियुक्ति की संभावना नहीं है.

हामिद करज़ई पर पश्चिमी देशों का दबाव है वो कि नए मंत्रिमंडल में ऐसे लोगों को मौक़ा दें जो भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के लिए प्रतिबद्ध हों.

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