अफ़ग़ानिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र चिंतित

काई एडी
Image caption हामिद करज़ई के विवादास्पद चुनावों के दौरान काई एडी संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि के तौर पर अफ़ग़ानिस्तान में थे

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि काय एडा ने कहा है कि नकारात्मक रुख़ की वजह से देश की स्थिति बेक़ाबू हो जाने का ख़तरा है.

संयुक्त राष्ट्र में अपने कार्यकाल के अंतिम संबोधन में उन्होंने कहा है कि वे तालेबान चरमपंथियों की बढ़ती मज़बूती को लेकर वे चिंतित हैं.

काय एडा का कार्यकाल मार्च में ख़त्म होने जा रहा है.

उन्होंने कहा कि वे अपेक्षाएँ पूरी न होने की वजह से अफ़ग़ान नागरिकों में जो कुंठा पैदा हो रही है, उससे भी वे चिंतित हैं.

संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में नागरिक संस्थाओं को मज़बूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए जिससे कि अफ़ग़ान ख़ुद शासन चला सकें.

चिंता

न्यूयॉर्क में सुरक्षा परिषद के समक्ष उन्होंने कहा कि पुलिस और सेना को प्रशिक्षण देना महत्वपूर्ण है लेकिन सिर्फ़ सैन्य रणनीति से यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि अफ़ग़ान ख़ुद कमान संभाल लेंगे.

उनका कहना था कि शिक्षा, कृषि और ढाँचागत विकास भी देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए अहम है क्योंकि इन्ही के सहारे सरकारें चला करती हैं.

काय एडा ने कहा कि नकारात्मक रुख़ की वजह से अफ़ग़ानिस्तान के भीतर और बाहर भी लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है.

उन्होंने कहा, "अफ़ग़ान और अंतरराष्ट्रीय फ़ौजों को चरमपंथियों पर क़ाबू पाने में जो मुश्किलें आ रही हैं, मैं उससे चिंतित हूँ."

इसके साथ लोगों की कुंठा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "ये कुछ ऐसी नकारात्मक प्रवृत्तियाँ हैं, जिन्हें अगर नहीं पलटा गया, तो एक ख़तरा है कि स्थिति बेक़ाबू हो जाएगी."

उल्लेखनीय है कि पिछले हफ़्ते ही अफ़ग़ान संसद ने राष्ट्रपति हामिद करज़ई के मंत्रिमंडल के 24 में से 17 मंत्रियों के नाम को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया है और इसकी वजह से वहाँ सरकार के नाम पर नाममात्र के लोग काम कर रहे हैं.

संभावना है कि राष्ट्रपति करज़ई अगले कुछ दिनों में संसद के सामने मंत्रिमंडल के लिए नए नामों का प्रस्ताव रखेंगे.

हामिद करज़ई अगस्त में हुए विवादास्पद चुनावों में विजयी घोषित किए हैं.

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