नेपाल में बाल सैनिकों की रिहाई शुरू

शिविर में माओवादी
Image caption बाल सैनिक की रिहाई नेपाली में जारी शांति प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

नेपाल में माओवादियों के लिए बनाए गए शिविरों में रखे गए हज़ारों बाल सैनिकों की रिहाई शुरू होने वाली है.

इन बाल सैनिकों को 2006 में हुए शांति समझौते के बाद संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाले शिविरों में पूर्व माओवादी विद्रोहियों के साथ रखा गया है.

इस समझौते के साथ ही नेपाल में 10 साल से चले आ रहे माओवादी विद्रोह का अंत हो गया था.

बाल सैनिकों की रिहाई नेपाली में जारी शांति प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

तीन विकल्प

मध्य नेपाल के सिधुली ज़िले में बने संयुक्त राष्ट्र के शिविर में बाल सैनिकों की रिहाई की शुरुआत के लिए औपचारिक समारोह शुरू हो गया है.

शिविरों से रिहा होने वाले इन पूर्व बाल सैनिकों को स्कूल जाने, व्यावसायिक शिक्षा लेने या अपना व्यवसाय शुरू करने का विकल्प दिया गया है.

नेपाल में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में चलाए जा रहे सात प्रमुख शिविरों में क़रीब 20 हज़ार पूर्व माओवादी विद्रोही रह रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने इनमें से क़रीब तीन हज़ार ऐसे लोगों की पहचान की है जिनकी उम्र 18 साल से कम है.

सरकार ने कहा है कि वह चाहती थी कि सभी बाल सैनिकों की नवंबर के शुरू में ही रिहाई शुरू हो जाए.

काठमांडू से क़रीब 125 किमी दूर दुधौली में बनाए गए एक शिविर के उप कमांडर गोपाल पांडेय ने कहा है कि रिहाई की संभावना से बच्चे परेशान है.

समाचार एजेंसी एपी से उन्होंने कहा, ''शिविर छोड़ने को लेकर वो सभी बहुत भावुक हैं लेकिन उन्हें इस बात का एहसास है कि शांति प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए यह ज़रूरी है.''

नेपाली माओवादी चाहते थे कि शांति प्रक्रिया के तहत उन्हें राष्ट्रीय सेना में शामिल किया जाए लेकिन सेना प्रमुख ने ऐसा करने से इंकार कर दिया था.

माओवादियों ने 2008 में संविधान सभा के चुनाव में भारी जीत दर्ज की थी लेकिन सेना प्रमुख को हटाने के मुद्दे पर हुए विवाद के बाद वो सरकार से हट गए थे.

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