काबुल में लड़ाई ख़त्म, मारे गए चरमंपथी

काबुल हमला

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल संदिग्ध तालेबान चरमपंथियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच घंटों तक चली गोलीबारी के बाद शांत है. अधिकारियों का कहना है कि लड़ाई ख़त्म हो गई है और सभी चरमपंथी मारे गए हैं.

अधिकारियों के मुताबिक़ लड़ाई में सात चरमपंथी, तीन सुरक्षाकर्मी और दो आम नागरिक मारे गए हैं. जबकि 70 लोग घायल हुए हैं.

सड़कों पर सिर्फ़ अफ़ग़ानिस्तान के सैनिक दिख रहे हैं. लेकिन आशंका ये भी जताई जा रही है कि अब भी कई चरमपंथी छिपे हुए हैं और हमले की तैयारी में है.

सोमवार की सुबह क़रीब 10 बजे एकाएक काबुल के अतिसुरक्षित इलाक़े में गोलीबारी और धमाकों की आवाज़ें आनी शुरू हो गईं.

इसी इलाक़े में राष्ट्रपति निवास, सरकारी इमारतें और कई मंत्रालयों के कार्यालय हैं. साथ ही कई व्यवस्त बाज़ार भी इस इलाक़े में मौजूद हैं.

अधिकारियों की मानें तो चरमपंथियों में कुछ आत्मघाती हमलावर थे, तो कुछ मशीनगनों से लैस थे.

आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उन्हें लगता है कि हमले में सात आत्मघाती हमलावर थे.

उन्होंने बताया कि चार हमलावरों ने सेरेना होटल के निकट एक शॉपिंग सेंटर पर हमला किया. जबकि तीन चरमपंथियों ने एक सिनेमाघर को निशाना बनाया.

प्रवक्ता के मुताबिक़ सभी हमलावर मारे जा चुके हैं. हालाँकि तालेबान ने दावा किया था कि इन हमलों में उसके 20 लड़ाके शामिल हैं.

आलोचना

राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है- राष्ट्रपति काबुल की जनता को भरोसा दिलाना चाहते हैं कि सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में हैं और सामान्य स्थिति बहाल कर दी गई है.

इस बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई हमलों की आलोचना करते हैं और सुरक्षाकर्मियों को ये आदेश दिया गया है कि वे शहर की सुरक्षा और कड़ी करें.

बीबीसी संवाददाता हमलों के दौरान सेरेना होटल के बेसमेंट में थे. उन्होंने बताया है कि अब गोलीबारी की आवाज़ें नहीं आ रही हैं.

अमरीका ने इस हमले की आलोचना की है. अमरीकी दूतावास का कहना है कि तालेबान के हमले में अफ़ग़ानिस्तान की सरकार और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया गया है.

सोमवार की सुबह हमला उस समय शुरू हुआ, जब सड़कों पर काफ़ी चहल-पहल होती है. हमला सेरेना होटल और राष्ट्रपति निवास के पास शुरू हुआ.

हमले के समय राष्ट्रपति हामिद करज़ई की कैबिनेट के नए सदस्यों को शपथ दिलाई जा रही थी.

Image caption सुरक्षाकर्मियों ने इलाक़े को घेर रखा है

हमले के दौरान एक सरकारी कार्यालय में फँसे एक अधिकारी ने बाद में समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "हर ओर अफ़रा-तफ़री का माहौल है. हमें ये नहीं पता कि कहाँ जाना है और क्या करना है."

पिछले कुछ समय से तालेबान चरमंपथियों ने राजधानी काबुल पर कई हमले किए हैं.

अक्तूबर में संयुक्त राष्ट्र के एक गेस्ट हाउस पर हुए हमले में संयुक्त राष्ट्र के पाँच कर्मचारी मारे गए थे. उस समय होटेल सेरेना पर भी हमला हुआ था.

काबुल से बीबीसी संवाददाता मार्क डमेट का कहना है कि ताज़ा हमले से लोगों में चिंता और बढ़ेगी क्योंकि इस अतिसुरक्षित इलाक़े में चरमपंथियों ने फिर हमला किया है.

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