रॉबर्ट गेट्स भारत-पाक दौरे पर

Image caption रॉबर्ट गेट्स बुश प्रशासन में भी अमरीका के रक्षा मंत्री थे.

अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स मंगलवार से तीन दिनों के भारत दौरे पर आ रहे हैं जहां वो मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्तों पर बात करेंगे.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के वाशिंगटन दौरे के बाद भारत सरकार और ओबामा प्रशासन के बीच ये पहली उच्च स्तरीय मुलाक़ात है.

अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागॉन का कहना है कि गेट्स प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विदेश मंत्री एस एम कृष्णा, रक्षा मंत्री ए के एंटनी और सेना प्रमुख से भी मिलेंगे.

शीत युद्ध के दिनों में भारत और अमरीकी सेना के बीच बहुत कम संपर्क था लेकिन अब दोनों संयुक्त अभ्यास भी करते हैं और भारत अमरीकी हथियारों का एक बड़ा खरीदार है.

साल 2008 में भारत ने अमरीका से 3.5 अरब डॉलर के हथियार खरीदे लेकिन पेंटॉगन के प्रवक्ता ज्योफ़ मोरेल का कहना है कि इस दौरे का मकसद हथियारों की बिक्री नहीं है.

उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य है भारत पाकिस्तान रिश्तों को बेहतर करने की कोशिश, आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक साझा रणनीति पर बात और साथ ही अफ़गानिस्तान में भारत की और सक्रिय भूमिका पर बातचीत.

Image caption अमरीका भारत पाकिस्तान संबंधों को सामान्य करना चाहता है जिससे पाकिस्तान अपनी पश्चिमी सीमा पर ज़्यादा ध्यान दे.

रक्षा मंत्री गेट्स भारत के बाद पाकिस्तान भी जाएंगे जहां नई अफ़गान रणनीति पर बातचीत के अलावा वो तालिबान के ख़िलाफ़ अभियान को दक्षिण से उत्तरी वज़ीरिस्तान तक बढ़ाने का दबाव डालेंगे जहां कथित तौर पर अफ़गान तालिबान का डेरा है.

पाकिस्तान अभी ये फ़ैसला नहीं कर पाया है कि वो अपनी फ़ौजी कार्रवाई और फैलाए या नहीं लेकिन ओबामा प्रशासन अपनी नई अफ़गान नीति के तहत इसके लिए दबाव डाल रहा है.

पाकिस्तानी अख़बारों का कहना है कि पाकिस्तान इस दौरे में अमरीका से दो अरब डॉलर की बकाया राशि की मांग करेगा और साथ ही फ़ौजी उपकरणों की आपूर्ति और तेज़ करने के लिए दबाव बनाएगा.

इस बीच अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान मामलों पर अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रूक भी पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के दौरे के बाद भारत में हैं.

काबुल से दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वो ``सलाह मशविरे के लिए भारत जा रहे हैं, किसी समझौते या लेनदेन के लिए नहीं.’’

संभावना है कि हॉलब्रूक भारतीय पक्ष को राष्ट्रपति ओबामा की नई अफ़गान नीति के बारे में बताएंगे जिसका अहम हिस्सा है फ़ौज में बढ़ोतरी.

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