पाक ने अमरीकी योजना पर पानी फेरा

पाकिस्तानी सेना
Image caption पाकिस्तानी सेना ने पिछले साल तालेबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरु की है

पाकिस्तान सेना ने कहा है कि वह वर्ष 2010 में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कोई नई कार्रवाई शुरु नहीं करेगी.

सेना के प्रवक्ता अथर अब्बास ने बीबीसी से कहा कि पाकिस्तान सेना पर पहले से ही काम का बहुत दबाव है और अगले 12 महीनों में चरमपंथियों नए सिरे से कार्रवाई शुरु करने की कोई योजना नहीं है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान सेना की ओर से आया यह बयान साफ़ तौर पर अमरीकी योजना पर पानी फेरने वाला है.

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमरीकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स पाकिस्तान के दौरे पर हैं और ज़ाहिर तौर पर पाकिस्तान पर यह दबाव बनाने के लिए पहुँचे हैं कि अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाइयों का विस्तार किया जाए.

अहम समय

Image caption रॉबर्ट गेट्स ने एक दिन पहले ही कहा है कि अल-क़ायदा भारत और पाकिस्तान की सेना के बीच युद्ध भड़काना चाहता है

पिछले साल जनवरी में बराक ओबामा के कार्यभार संभालने के बाद से अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स की यह पहली पाकिस्तान यात्रा है.

रॉबर्ट गेट्स की एक दिवसीय पाकिस्तान यात्रा ऐसे अहम समय में हुई है जब अमरीका अल-क़ायदा और तालेबान से निपटने के लिए अफ़ग़ानिस्तान में 30 हज़ार सैनिक भेजने जा रहा है.

माना जा रहा है कि रॉबर्ट गेट्स पाकिस्तान सरकार से कहेंगे कि वह पाकिस्तानी सीमा में सक्रिय तालेबान के शीर्ष नेतृत्व के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के अपने प्रयास तेज़ कर सकती है.

इनमें से कुछ नेताओं के कथित तौर पर पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई से नज़दीकी संबंध हैं.

पाकिस्तान सेना ने वर्ष 2009 में पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में तालेबान के गढ़ में कार्रवाई शुरु की थी.

स्वात के इलाक़े में कार्रवाई पिछले साल अप्रैल में शुरु की गई थी जबकि दक्षिण वज़ीरिस्तान में पिछले अक्तूबर में.

इन कार्रवाइयों के जवाब में चरमपंथियों ने पाकिस्तान में विभिन्न स्थानों पर बम और आत्मघाती हमले करने शुरु कर दिए. इन हमलों में अब तक पाकिस्तान में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं.

'विश्वास की कमी'

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता सईद शोएब हसन का कहना है कि पाकिस्तानी सेना का बयान शीर्ष अमरीकी अधिकारी की ज़ाहिर तौर पर उपेक्षा है और इस बयान से पहले से संकट झेल रही पाकिस्तान की गठबंधन सरकार को अपने अमरीकी साझीदार के सामने शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा.

उनका कहना है कि इससे पाकिस्तान में तालेबान को यह राहत होगी कि पाकिस्तान की ओर से दबाव बढ़ने वाला नहीं है लेकिन यह अफ़ग़ानिस्तान में नैटो और अमरीकी सेना के विस्तार को अप्रभावी भी बना देगा.

इस्लामाबाद पहुँचने से पहले रॉबर्ट गेट्स ने अपने साथ सफ़र कर रहे संवाददाताओं से कहा, "आप इस कैंसर के एक हिस्से को अनदेखा करके यह सोचते नहीं रह सकते कि इसका कोई असर नहीं होगा."

गेट्स की पाकिस्तान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पाकिस्तान और अमरीका के बीच रिश्तों में थोड़ी खटास आई है.

गुरुवार को पाकिस्तान के एक अख़बार में प्रकाशित लेख में उन्होंने 'विश्वास की कमी' का ज़िक्र किया है.

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