तालेबान से पाबंदी हटाने की पहल

ज़रदारी के साथ हामिद करज़ई

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि वे लंदन में होने वाले सम्मेलन में कुछ तालेबान नेताओं के ख़िलाफ़ प्रतिबंध हटाने का प्रस्ताव रखेंगे.

ये सम्मेलन इसी सप्ताह होने वाला है. हामिद करज़ई का मानना है कि उनके पश्चिमी सहयोगी देश उन तालेबान सदस्यों के लिए उनकी मेल-मिलाप की योजना का समर्थन करते हैं, जो अल क़ायदा का विरोध करते हैं.

राष्ट्रपति करज़ई ने इस्तांबुल में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी से मुलाक़ात के बाद ये बयान दिया है.

इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के एक शीर्ष कमांडर जनरल स्टैनली मैक्रिस्टल ने भी तालेबान के साथ बातचीत करके शांति की उम्मीद जताई थी.

ब्रिटेन के अख़बार फ़ाइनेंशियल टाइम्स के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था, "एक सैनिक के नाते मेरा निजी विचार ये है कि बहुत लड़ाई हो चुकी. मेरा मानना है कि सभी विवादों का राजनीतिक समाधान एक निश्चित नतीजा है और यही सही नतीजा भी है."

प्रस्ताव

दूसरी ओर इस्तांबुल में पाकिस्तान के राष्ट्रपति से मुलाक़ात के बाद हामिद करज़ई ने कहा, "लंदन में होने वाले सम्मेलन में मैं संयुक्त राष्ट्र की पाबंदी वाली सूची में से तालेबान का नाम हटाने के बारे में प्रस्ताव रखूँगा."

उन्होंने कहा कि इस बार इस योजना पर विचार करने पर ज़्यादा रुचि दिखाई जा रही है, हालाँकि इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया था.

इस्तांबुल से बीबीसी संवाददाता जोनाथन हेड का कहना है कि तालेबान के साथ बातचीत का विचार नया नहीं है, लेकिन अगर इस विचार को इस्तांबुल और लंदन में समर्थन मिला तो यह अफ़ग़ानिस्तान में संघर्ष ख़त्म करने की रणनीति का आधार बन सकता है.

हाल ही में राष्ट्रपति करज़ई ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा था कि वे एक योजना लाने का विचार कर रहे हैं, जिसके तहत तालेबान लड़ाकों को सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए पैसे और नौकरी देकर उत्साहित किया जाएगा.

उन्होंने उम्मीद जताई है कि मेल-मिलाप की उनकी इस योजना को लंदन सम्मेलन में अमरीका और ब्रिटेन का समर्थन मिलेगा.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन पहले ही अपनी ये धारणा व्यक्त कर चुके हैं कि तालेबान टूट सकता है.

अमरीका मुल्ला उमर जैसे कट्टरपंथी नेता के ख़िलाफ़ प्रतिबंध हटाने का विरोध करता है लेकिन उसने भी शांति समझौते के तहत तालेबान के कुछ सदस्यों को स्वीकार करने की बात कही है.

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