राजपक्षे की जीत को चुनौती

Image caption जनरल फ़ोनसेका (दाहिनी ओर) ने चुनाव को धांधलीपूर्ण बताते हुए कहा है कि वो फ़ैसले को चुनौती देंगे.

श्रीलंका के चुनाव आयोग ने एलान किया है कि राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे दोबारा राष्ट्रपति निर्वाचित हो गए हैं लेकिन उनके मुख्य प्रतिद्वंदी जनरल फ़ोनसेका ने इस परिणाम को खारिज करते हुए कहा है कि वो इस फ़ैसले को चुनौती देंगे.

चुनाव आयोग ने कहा है कि राष्ट्रपति राजपक्षे को 57 प्रतिशत वोट मिले जबकि जनरल फ़ोनसेका को 40 प्रतिशत.

सैनिकों से घिरे एक होटल में प्रेस कॉंफ़्रेंस के दौरान जनरल फ़ोनसेका ने कहा कि चुनाव में धांधली हुई है और सरकार उन्हें जान से मरवाने की कोशिश कर रही है.

सरकार का कहना है कि जनरल होटल छोड़ने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन उन्हें उन आरोपों के नतीजों का सामना करना होगा जो उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान लगाए हैं.

कोलोंबो में मौजूद बीबीसी संवाददाता एहतिराजन अनबरासन का कहना है कि माहौल काफ़ी तनावपूर्ण है और विपक्षी गठबंधन ने सरकार से अपील की है कि वो होटल के बाहर से सेना हटा ले.

श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों की हार के बाद हुए पहले राष्ट्रपति चुनाव में लगभग 70 फ़ीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था.

इस चुनाव में मुख्य मुक़ाबला मौजूदा राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और पूर्व सेना प्रमुख जनरल सनथ फ़ोनसेका के बीच था जिन्होंने तमिल विद्रोहियों को हराने में मुख्य भूमिका अदा की थी.

जनरल फ़ोनसेका को पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग समेत कुछ विपक्षी दलों का समर्थन हासिल था.

श्रीलंका के चुनाव नियमों के अनुसार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को 50 फ़ीसदी मत हासिल करना ज़रूरी है. यदि ऐसा नहीं होता है तो दूसरे और तीसरी वरीयता के मत जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

बिना दबाव के चुनाव

Image caption राष्ट्रपति राजपक्षे का दावा काफ़ी मजबूत माना जा रहा था

लंबे समय के बाद चुनाव के दौरान उत्तरी श्रीलंका के तमिल मतदाताओं पर एलटीटीई का कोई दबाव नहीं था जिसने चार साल पहले उन्हें चुनाव का बहिष्कार करने का आदेश दिया था.

चुनाव प्रचार के दौरान दोनों ही प्रत्याशी ज़्यादातर बहुसंख्यक सिंहली समुदाय को ही ख़ुश करने की कोशिश में लगे रहे और दोनों ने ही तमिल विद्रोहियों को हराने में अपनी भूमिका को भुनाने की जमकर कोशिश की.

इसके अलावा दोनों ही प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार के दौरान एक दूसरे पर जमकर तीखे प्रहार किए.

राष्ट्रपति पद के लिए कुल 22 प्रत्याशी मैदान में थे लेकिन मुख्य मुक़ाबला राजपक्षे और जनरल फ़ोनसेका के बीच ही माना जा रहा था.

तमिलों के प्रमुख राजनीतिक समूह तमिल नेशनल एलांयस ने पहले ही जनरल फ़ोनसेका को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी.

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