संयुक्त राष्ट्र ने तालेबान नेताओं से प्रतिबंध हटाया

मुत्तवकील
Image caption वकील अहमद मुत्तवक्किल तालेबान सरकार में विदेश मंत्री रहे थे

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक समिति ने पाँच पूर्व तालेबान नेताओं से प्रतिबंध हटा लिया है.

माना जा रहा है कि ये क़दम अफ़ग़ानिस्तान सरकार और संयुक्त राष्ट्र के अच्छे तालेबान और बुरे तालेबान की नीति के तहत उठाया है.

इनमें अफ़ग़ानिस्तान की तालेबान सरकार में विदेश मंत्री रहे वकील अहमद मुत्तवक्किल, पूर्व वाणिज्य उपमंत्री फज़ल मोहम्मद, तालेबान के पूर्व प्रेस अधिकारी शम्स-उस-अमीनज़ई और योजना विभाग के पूर्व उपमंत्री मोहम्मद मूसा होत्तक शामिल हैं.

इसके अलावा पाँचवे शख्स अब्दुल हकीम हैं जिन्होंने तीन वर्ष पहले ही तालेबान का साथ छोड़ने की घोषणा कर दी थी और अब वो उरुज़गन प्रांत के गवर्नर हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान जारी कर कहा है कि प्रतिबंधित लोगों की सूची की समीक्षा के बाद इन पाँच लोगों को उससे हटा दिया गया है और इनके विभिन्न देशों के आवागमन और चल अचल संपत्ति पर प्रतिबंध नहीं होगा.

इन पाँचों को इनके अल क़ायदा के साथ संबंधों के कारण 2001 में संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित सूची में डाल दिया गया था.

संयुक्त राष्ट्र ने ये फ़ैसला अफ़ग़ानिस्तान पर 60 देशों के लंदन में होने वाले सम्मेलन से एक दिन पहले लिया है.

इसके पहले अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा था कि वो लंदन में होने वाले सम्मेलन में कुछ तालेबान नेताओं के ख़िलाफ़ प्रतिबंध हटाने का प्रस्ताव रखेंगे.

हामिद करज़ई का मानना है कि उनके पश्चिमी सहयोगी देश उन तालेबान सदस्यों के लिए उनकी मेल-मिलाप की योजना का समर्थन करते हैं, जो अल क़ायदा का विरोध करते हैं.

इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के एक शीर्ष कमांडर जनरल स्टैनली मैक्क्रिस्टल ने भी तालेबान के साथ बातचीत कर शांति की उम्मीद जताई थी.

करज़ई का समर्थन

ब्रिटेन के अख़बार के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था, "एक सैनिक के नाते मेरा निजी विचार ये है कि बहुत लड़ाई हो चुकी. मेरा मानना है कि सभी विवादों का राजनीतिक समाधान एक निश्चित नतीजा है और यही सही नतीजा भी है."

उन्होंने कहा कि इस बार इस योजना पर विचार करने पर ज़्यादा रुचि दिखाई जा रही है, हालाँकि इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया था.

तालेबान के साथ बातचीत का विचार नया नहीं है, लेकिन अगर इस विचार समर्थन मिला तो यह अफ़ग़ानिस्तान में संघर्ष ख़त्म करने की रणनीति का आधार बन सकता है.

हाल ही में राष्ट्रपति करज़ई ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा था कि वे एक योजना लाने पर विचार कर रहे हैं, जिसके तहत तालेबान लड़ाकों को सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए पैसे और नौकरी देकर उत्साहित किया जाएगा.

उन्होंने उम्मीद जताई थी कि मेलमिलाप की उनकी इस योजना को लंदन सम्मेलन में अमरीका और ब्रिटेन का समर्थन मिलेगा.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन पहले ही अपनी ये धारणा व्यक्त कर चुके हैं कि तालेबान टूट सकता है.

अमरीका मुल्ला उमर जैसे कट्टरपंथी नेता के ख़िलाफ़ प्रतिबंध हटाने का विरोध करता है लेकिन उसने भी शांति समझौते के तहत तालेबान के कुछ सदस्यों को स्वीकार करने की बात कही है.

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