पाक ने रखा ट्रेनिंग का प्रस्ताव

Image caption पाकिस्तानी सेना के प्रमुख के इस प्रस्ताव को कई विश्लेषक अफ़गानिस्तान में भारत का प्रभुत्व कम करने की कोशिश मान रहे हैं.

पाकिस्तानी फ़ौज के प्रमुख जनरल अशफ़ाक कियानी ने अफ़गानिस्तान की सेना को प्रशिक्षण देने की पेशकश की है.

पाकिस्तान की तरफ़ से इस तरह की पेशकश काफ़ी चौंकानेवाली मानी जा रही है क्योंकि अभी तक अफ़गानिस्तान पाकिस्तान पर तालिबान को मदद करने का आरोप लगाता रहा है.

जनरल कियानी ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने ये पेशकश एक हफ़्ते पहले ब्रसेल्स में नैटो गठबंधन के एक सम्मलेन में रखी है.

अमरीकी अख़बार वाल स्ट्रीट जरनल ने अफ़गानिस्तान में नैटो गठबंधन के प्रवक्ता अमरीकी फ़ौज के कर्नल ग्रेग ब्रेज़ील के हवाले से कहा है कि अमरीकी और अफ़गान अधिकारी इस प्रस्ताव पर सोच विचार कर रहे हैं.

माना जा रहा है कि इसेसे दोनों देशों की सेनाओं के बीच विश्वास में बेहतरी आ सकती है.

कर्नल ब्रेज़ील का कहना था, ``सरहद के दोनों तरफ़ काफ़ी क्षेत्रीय अविश्वास है लेकिन बातचीत चल रही है और देखना है कि बात कहां तक पहुंचती है.’’

उन्होंने बताया कि अफ़गान सैनिकों के प्रशिक्षण से जुड़े अमरीकी कमांडर अफ़गान अधिकारियों के साथ कुछ समय पहले इस तरह के प्रशिक्षण की संभावनाओं की छानबीन के लिए पाकिस्तान गए थे और जल्द ही वो वहां से लौटेंगे.

भारतीय प्रभाव

Image caption अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा है.

विश्लेषकों का कहना है कि जनरल कियानी की ये पेशकश अफ़गानिस्तान में भारत के प्रभाव को कम करने की कोशिशों का हिस्सा हो सकता है.

कुछ महीनों से पाकिस्तान में इस तरह की अफ़वाहें गर्म रही हैं कि भारत अफ़गान सैनिकों को प्रशिक्षण दे सकता है.

पाकिस्तान अफ़गानिस्तान में भारत के बढ़ते प्रभाव को लेकर काफ़ी असहज है और अमरीका के साथ होनेवाली बातचीत में कई बार इस विषय को उठा चुका है.

वहां ये सोच काफ़ी गहरी पैठ चुकी है कि भारत अफ़गानिस्तान में अपनी पहुंच इसलिए बढ़ा रहा है जिससे वो पाकिस्तान की रणनीतिक घेराबंदी कर सके.

भारत इन आरोपों को निराधार बताता रहा है.

भारत ने पिछले कुछ सालों में अफ़गानिस्तान में कुछ वाणिज्य दूतावास खोले हैं और अफ़गानिस्तान के पुनर्निमाण में सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश की है.

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