मौत की सज़ा बरक़रार

Image caption अंसारी हमले की योजना बनाने के दोषी पाए गए

कोलकाता के अमरीकी सांस्कृतिक केंद्र पर हमले के मामले में दोषी ठहराए गए दो लोगों की मौत की सज़ा को उच्च न्यायालय ने बहाल रखा है.

कोलकाता के अमरीकी सांस्कृतिक केंद्र पर 22 जनवरी 2002 को हुए इस हमले में पाँच पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी, जबकि 20 अन्य घायल हुए थे.

अधिकारियों के अनुसार कुल चार हमलावर दो मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए थे.

इस हमले के दो अभियुक्तों जमीलुद्दीन नासिर और आफ़ताब अंसारी को उसी साल गिरफ़्तार कर लिया गया था. दोनों पर भारत के ख़िलाफ़ लड़ाई छेड़ने का आरोप लगाया गया था.

हमले में शामिल रहे बाक़ी दो लोग पुलिस गिरफ्त में नहीं आ पाए.

वर्ष 2005 में कोलकाता की एक स्थानीय अदालत ने नासिर और अंसारी समेत सात लोगों को मृत्युदंड की सज़ा सुनाई थी.

सज़ा की पुष्टि

शुक्रवार के फ़ैसले के बारे में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य लोक अभियोजक असीमेश गोस्वामी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, “हाईकोर्ट ने अंसारी और नासिर की अपील ठुकराते हुए उन्हें मिले मृत्युदंड की पुष्टि कर दी.”

गोस्वामी ने बताया कि हाईकोर्ट ने मामले में तीन अभियुक्तों की सज़ा-ए-मौत को आजीवन कारावास में बदल दिया. जबकि शेष दो को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया.

अंसारी को संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया था. उस पर हमले की योजना बनाने का आरोप लगाया गया था.

अब नासिर और अंसारी उच्चतम न्यायलय में हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कर सकेंगे.

संसद पर हमले के कुछ ही हफ़्ते बाद हुए इस हमले से दक्षिण एशिया में तनाव और बढ़ गया था. पाकिस्तान ने इस हमले में अपनी कोई भी भूमिका से दो टूक इनकार किया था.

संबंधित समाचार