अनिवार्य सैन्य सेवा क़ानून पर विचार

करज़ई
Image caption करज़ई ने दो वर्षों में सुरक्षाबलों की संख्या तीन लाख करने की योजना बनाई.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि वह अपने देश में अनिवार्य सैन्य सेवा क़ानून बना सकते हैं.

जर्मनी के म्यूनिख में दुनिया भर के शीर्ष रक्षा अधिकारियों के सम्मेलन में करज़ई ने रविवार को कहा कि वह इस तरह का क़ानून लाने पर विचार कर रहे हैं.

इसके तहत सभी युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा ताकि आवश्यकता होने पर उनकी सेवाएँ ली जा सके.

उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2012 तक सैनिकों और पुलिस बलों की संख्या बढ़ा कर तीन लाख करना चाहते हैं.

उनका बयान ऐसे समय में आया है जब अमरीकी सेना हेलमंद प्रांत में तालेबान के ख़िलाफ़ सघन कार्रवाई की तैयारी कर रही है.

रक्षा मंत्री की अलग राय

नैटो कमांडर जनरल स्टेनली मैक्रिस्टल का कहना है कि इस अभियान से बहुत मज़बूत संदेश जाएगा.

करज़ई ने सम्मेलन में मौजूद लोगों से कहा कि कई अफ़ग़ान समुदाय के नेताओं ने उनसे अनिवार्य सैनिक सेवा क़ानून लाने की अपील की है.

अफ़ग़ान राष्ट्रपति ने कहा, "हमें अपने लोगों को सुरक्षा देनी होगी ताकि हम इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर बोझ बन कर नहीं रहें."

अफ़ग़ानिस्तान में वर्ष 1992 तक अनिवार्य सैन्य सेवा क़ानून लागू था और अब इसे दोबारा लागू करने की बात हो रही है.

हालाँकि अफ़ग़ान रक्षा मंत्री अब्दुल रहीम वर्दाक ने पिछले हफ़्ते कहा था कि अनिवार्य सैन्य सेवा का प्रावधान करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि सेना को नई भर्तियों में कोई दिक्कत नहीं हो रही है.

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