पाक 'सार्थक और समग्र' वार्ता के पक्ष में

Image caption बातचीत की कोई तारीख़ अभी तय नहीं हुई है.

पाकिस्तान ने भारत की तरफ़ से बातचीत के न्यौते के जवाब में कहा है कि वो एक “सार्थक और किसी नतीजे पर पहुंचनेवाली समग्र वार्ता के पक्ष’’ में हैं.

पाकिस्तान शुरू से ही मुंबई हमलों के बाद से रूकी समग्र वार्ता को बहाल करने की मांग करता रहा है लेकिन भारत ने अपने न्यौते में स्पष्ट किया था कि वो आतंकवाद के मामले पर बातचीत चाहते हैं और उसमें पाकिस्तान चाहे तो बलोचिस्तान के मामले पर भी बात हो सकती है.

बुधवार को इस्लामाबाद में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के नेतृत्व में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद जारी एक बयान के अनुसार, “पाकिस्तान सरकार ने भारत के साथ एक सार्थक और किसी नतीजे तक पहुंचनेवाली समग्र बातचीत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है जिससे दक्षिण एशिया में अमन चैन कायम हो और सभी मामले सुलझ सकें.”

इस बैठक में पाकिस्तानी विदेश सचिव सलमान बशीर, भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक के अलावा फ़ौज, ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई, रक्षा और गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारी शामिल हुए.

भारत ने अपनी तरफ़ से विदेश सचिव स्तर की बातचीत का प्रस्ताव रखा है लेकिन किसी तारीख़ पर सहमति नहीं बन पाई है.

Image caption विदेश मंत्री कुरैशी ने बातचीत के न्यौते के बाद काफ़ी आक्रामक रूख़ अपनाया घरेलू जनता के सामने.

विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय प्रस्ताव पर पाकिस्तान में एक कूटनीतिक दुविधा की स्थिति पैदा हो गई क्योंकि पाकिस्तान यदि बातचीत को तैयार होता है तो एक तरह से समग्र वार्ता की बात गौण हो जाती है और यदि नहीं स्वीकार करता है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उसकी छवि अवरोधक की बनती है.

माना जा रहा है कि यही वजह थी कि पाकिस्तान ने न्यौते का जवाब देने में इतनी सतर्कता बरती है और समग्र बातचीत का मामला फिर से उठाया है.

समग्र वार्ता में आठ मामले हैं और उसमें कश्मीर का मामला भी शामिल है.

पाकिस्तान के डॉन टेलिविज़न ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि बुधवार की बैठक में शामिल कई प्रतिनिधियों का मानना था कि प्रस्तावित बातचीत का कोई मतलब नहीं रहेगा यदि उसमें कश्मीर एजेंडा पर नही हो.

चैनल ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि पाकिस्तान बातचीत ज़रूर करे लेकिन ये भी सुनिश्चित करे कि जो अहम मामले हैं वो दरकिनार नहीं किए जाएं.

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